हिचकियां

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01 -Nov-2017 अमर Bewafai Poems 0 Comments  36 Views
हिचकियां

हिचकियां कह रहीं है मुझसे अब मुझे याद कर रहे हो तुम हर सफर का तुम्हारा वादा था हाथ ग़ैर का आज थामें हो तुम मिलती थी तासीर मसीहाई की उसे ज़ख्म गहरा दे गए हो तुम सुबह आंखे पढ़ ली जमाने ने रात सारी आंखों में रहे हो तुम

एक टूटा दिल....

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10 -Oct-2017 Shah Asad Nafis Bewafai Poems 0 Comments  99 Views
एक टूटा दिल....

मेरे दिल में महशर उठा था मैं तुमको अपनी जिंदगी समझा था तू मेरी जान थी मेरी शान थी मैं तेरी तिश्नगी बुझाने चला था मेरा दिल चमक उठा था मैं तेरी हसरत पिरोने चला था यह मेरी रानी सुन,मैं तेरी कुर्बत में तेरी दिल की रंजि

Mohabbat ne puchh bewafai se,

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06 -Oct-2017 pravin tiwari Bewafai Poems 0 Comments  94 Views
Mohabbat ne puchh bewafai se,

Mohabbat ne puchh bewafai se, tum kyon do dilon ko juda kar deti ho..? Jis dil mein pyar dhadkta hai, us dil mein nafrat ka zahar kyun ghol deti ho..? Yah sunkar bewafai man hi man muskai, aa kar paas mohabbat ke apne dil ki baat bataai. Maana ki ai mohabbat tu har dil ki chaahat hai, tujhse hi to milati har dil ko raahat hai. Par mera wajood bhi yun hi nahi rab ne banaya hai, kuchh soch kar hi khuda ne... mohabbat ke sang bewafai ko joda hai. har insaan kahan mohabbat wafa se yaha nibhata hai, use to mohabbat se khelne mein hi maja aata hai. t

ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

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18 -Sep-2017 Madan Saxena Bewafai Poems 1 Comments  126 Views
ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)

जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं वह हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं जब हकीकत हम उनको समझाने लगते हैं जिस गलती पर हमको वह समझाने लगते है वही गलती को फिर वह दोहराने लग

अनजानी मोहब्बत

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12 -Aug-2017 निशंक Bewafai Poems 0 Comments  235 Views
अनजानी मोहब्बत

नाराजगी नही परेशानी होती है कभी कभी खामोशी मे भी छिपी कोई कहानी होती है हम जानते है वो न मेरा है और न मेरा कभी होगा फिर भी मोहब्बत इन सबसे न जाने क्यो अन्जानी होती है बस मिलती है ऑखो मे नमी वक्त की बिखरी कहानी होती ह

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