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Bas Sukhi Rahe...

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11 -Nov-2014 JAIDEEP VERMA Bewafai Poems 0 Comments  1,694 Views
JAIDEEP VERMA

इस दीवानेपन कि ज़िद में
धरती अम्बर सब छूट गए
जिसको माना था मैंने अपना
वो भी तो हमसे रूठ गए
अपनी बातें समझाने में जाने कहाँ कसक रही
कुछ कुछ चुप सी रहती थी वो
कुछ कुछ तो हम भी मूक रहे
नहीं मांगता साथ मैं उसका
न ही वो दोहरा प्यार मैं उसका
बस माँगा है तो इतना ही
वो जहाँ रहे बस सुखी रहे
जाने क्या सोचा होगा उसने
जाने मुझसे क्यूँ दूर हुई
करके तनहा अब वह मुझको
लगता है अब वह पूर हुई
तू कुछ न कर मेरे खातिर
बस इतना तू एहसान कर
कुछ दर्द समझ ले मेरा भी
फिर चाहे तू आराम कर
मैं रहूँ यहाँ ना रहूँ सदा
मेरी यादें सदा तेरे साथ रहे
बस माँगा है तो इतना ही
वो जहाँ रहे बस सुखी रहे.……



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