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बेवजह जज़्बातों को जगाते ही क्यों हो...!

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15 -Sep-2019 Suman Kumari Memories Poems 0 Comments  179 Views
बेवजह जज़्बातों को जगाते ही क्यों हो...!

बेवजह जज़्बातों को जगाते ही क्यों हो..
गर यकीं नहीं तो दिल लगाते ही क्यों हो..

जब आकर चले जाना फितरत में है तेरी,
तो फिर बेवजह ज़िन्दगी में आते ही क्यों हो..

अपना नहीं सकते जिसे उम्र भर के लिए,
उसे जमाने से अपना बताते ही क्यों हो...

जिन रिश्तों को समेटना आता नहीं तुम्हे,
उन रिश्तों को फिर आजमाते ही क्यों हो..

जब वजह दे नहीं सकते पल भर मुस्कुराने ,
तो खामखां इस तरह से रुलाते ही क्यों हो...!!!


सुमन कुमारी
भाबुआ बिहार



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