Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Bharat Mata se baatein

0
24 -Aug-2018 Rashmi Gupta 15 August Poem 0 Comments  848 Views
Rashmi Gupta

इक दिन मै बोली भारत माँ से -
इतना संयम, इतना धैर्य, कहा से लाती भारत माता !
सब कुछ सह के, फिर मुस्का के, कैसे रहती भारत माता !

कुछ झिझकी, कुछ सोचने लगी, फिर वो मुझसे यू बोली -
दुख के दिन भी देखे मैने, खुशहाली भी देखी है,
प्रसन्नता के अनमोल पल और हरियाली भी देखी है,
कुछ सदियो से लेकिन जैसे, समय मै कुछ बदलाहट है,
ह्रदय मे अनजानी सी कही कोइ घबाहट है ।

मुग़लो ने भी सितम किए थे, अंग्रेज़ो ने लूटा था ।
उनके जाते जाते, मेरा इक अंग भी मुझसे छूटा था ।
ओरो का उत्पीड़न सहना, फिर भी इससे बहतर था ।
अपने बच्चो के वारो और उन ज़ुल्मो मै अंतर था ।
अपने ही जब मुझे सताये, फिर मै धीर धरू कैसे ।
मेरे बच्चे मुझपे अपना खून बहाए, सहू कैसे ।

अपनी इस दूर्दशा पे चुपके चुपके रोती हूँ ।
फिर भी अपने बच्चो के खातिर, सब्र का घूँट पीती हूं।
मिले तुम्हे तो उन्हे बताना, माता उनकी आहत है ।
विचलित मन से तड़प रही है, माँगती थोड़ी राहत है ।

सिसक गई मै, ठिठक गया मन, सुन भारत माँ की ये पुकार ।
जी चाहता था, गले लगा लू और उनपे लाड़ लड़ाऊ आज ।
तुमने हमको बहुत दिया माँ, बहुत प्यार से पाला है ।
तुमको हम खुश रख पाये, अब ये फ़र्ज़ हमारा है ।

कैसे तेरी पीड़ा देखू, कैसे मै तुझको बतलाऊ ।
चाहत है मेरे मन की, मै तुझको राहत दे पाऊ ।
तेरी चमक वापस लाने को, हम अपना हर कदम बढ़ायेंगे ।
नही रुकेंगे, नही थकेंगे, हम तेरा मान बढ़ायेंगे ।
नही रुकेंगे, नही थकेंगे, हम तेरा मान बढ़ायेंगे ।।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017