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भ्रष्ट राजनीती।

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27 -Apr-2022 Harpreet Ambalvee Politics Poem 0 Comments  73 Views
Harpreet Ambalvee

ये कौन है,
जो नई फसलों की जड़ों को हिला रहा है
ये कौन है,
जो धर्म जाति के नाम पर नफरत फैला रहा है,
ये कौन है,
जो हिंद की नींव से खिलवाड़ कर रहा है,
ये कौन है
जो युवाओ मे नशे, लड़ाई के बीज
भर रहा है,
ये कौन है
जो नई मजबूत दीवारों में सेंध लगा रहा है,
नहीं इनको मतलब किसी की जान से,
आए लाख मुसीबत चाहे किसी की आन पर,
ये कौन है,
जो खून से एक दूसरे के हाथों को रंगवा रहा है
ये कौन है,
जो भाई को भाई से लड़ा रहा है,

हर एक धर्म का मकसद मिलकर प्यार से रहने में ही था,
ये कौन है,
जो सब मे हैवानियत की बू फैला रहा है,

नहीं रहा मकसद या तालीम में किसी भी धर्म मे,
किसी के भी दिल को अपने स्वार्थ के लिए दुखाना,
ये कौन है,
जो राम,अल्लाह, यीशु, वाहेगुरु के नाम पर भटका रहा है,

ये सियासत, ये धर्म के ठेकेदार खुद अपने भी नहीं रहे,
तो कोई क्यों इनके बहकावे में आ रहा है,

मिल जुल कर रहना प्यार से,
यही इबादत है उस रब की,
यही प्यार दुनिया मे पहचान रहा है हिन्द की,

गन्दी राजनीती और पूंजीवाद को इस देश से उखाड़ डालो,
अम्बालवी अपनी नज़म से बस यही समझा रहा है,
ये कौन है सब जानते है, फिर कयो कोई गलत बटन दबा रहा है।

भ्रष्ट राजनीती।


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