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बिन पेदी के लोटा बदरा

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11 -Aug-2018 nil Cloud Poems 0 Comments  1,148 Views
बिन पेदी के लोटा बदरा

बिन पेदी के लोटा बदरा
जब देखो तब खींचा तानी /बच्चों सी करते मन मानी

मन मौजी अब बदरा हो गए /बिन पेदी के लोटा होगए
जब चाहे तब रिमझिम बरसें सर सरिता को पानी परसें
गुस्से में आजायें फिर तो/लगातार बरसें बस बरसें
दशों दिशा में पानी पानी /जन जीवन हो पानी पानी ---

सूरज को भी आंख्न दिखाएं / धरा गगन पर रौब जमाएं
आँख मिचौनी खेल रचाएं /दिखा अंगूठा खूब चिढ़ाएं
बूँद बूँद को तरसा तरसा / ढोल नगाड़े खूब बजाएं
बन जाएँ फिर कथा कहानी सब जग मांगे पानी पानी ---

आंधी पानी साथ साथ लें /त्योहारों का हाथ साथ ले
गरजें बदरा बरसें ओले /खील बताशा मांगें झोले
सूरज जब फटकार लगाये /भाग जायं बरसा कर ओले
त्योहारों पर कर मनमानी /मजा किरकिरा पानी पानी--
[ भोपाल :१९.१०.२००६]



Dedicated to
to all nautre loving

Dedication Summary
motivational

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