Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

पंछी निराले रंगीले

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12 -Jun-2021 Manoj Kumar Birds Poem 0 Comments  41 Views
पंछी निराले रंगीले

पंछी निराले रंगीले, उड़ चले हवा में पंख फैलाकर। मंजिल तक जाना था उनका, नहीं हटे किसी से डर कर। हौसला था मन में, जाना है वहां, अपना कर्तव्य छोड़ा नहीं, संघर्ष करते रहे। पंख टूटने से डरे नहीं, हवाओं से बाते किए, सोच बदल

वो गौरैया

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21 -Mar-2021 Keshav Birds Poem 0 Comments  197 Views
वो गौरैया

विस्व काव्य दिवस के अवसर पर समर्पित गौरैया-गौरेया,मैं और तुम। वो बचपन के दिन कहां हो गए गुम। तुम सुबह मुडेर पर आती थी। अपने नन्हें-नन्हें पंखो को फैलाती। वो कल की बात है,आज तार टुटा सा है। तेरा मेरा रिस्ता थोरा अनु

ओ गौरैया !

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20 -Mar-2021 Dr. Archana Tirkey Birds Poem 0 Comments  395 Views
ओ गौरैया !

उन्मुक्त नीले आकाश में स्वच्छंद विचरती थी गौरैया पवन के मद्धिम झोकों से लहलहाती धान की फसल झूमती पुष्प -फलों से शोभित वृक्षों औ' हरे -भरे बागान की उपज मध्य मधुर स्वर तुम्हारा था गूंजता | महत्वाकांक्षाओं से पूर्ण

गौरैया

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28 -Mar-2020 Suresh Chandra Sarwahara Birds Poem 0 Comments  708 Views
गौरैया

गौरैया ______ अन्धाधुन्ध विकास से, गौरैया हैरान। अपने पूर्ण विनाश का, लगा रही अनुमान।। * जंगल कट कर बन गए बहुमंजिल के फ्लैट। गौरैया के घोंसले, करते मटियामेट।। * दूषित जल विषमय हवा, नहीं अन्न तरु ठूँठ। जाना ही था एक दिन,

मेरे घर भी आओ बुलबुल

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25 -Feb-2020 Dr Amit Jain Birds Poem 1 Comments  824 Views
मेरे घर भी आओ बुलबुल

मेरे घर भी आओ बुलबुल, मुंडेरों पर चहचाओ बुलबुल, ख्वाबों का कोई घरौंदा, मेरे अंगना बनाओ बुलबुल, मेरे घर भी आओ बुलबुल, गाना कोई सुनाओ बुलबुल, ऐसे ना उड़ जाओ बुलबुल, हम अच्छे इंसान हैं बुलबुल, प्यार से दाना खिलाएंगे बुल

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