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बलात्कार

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13 -Nov-2018 Abbas Bohari Social Issues Poems 0 Comments  143 Views
Abbas Bohari

क़ुरान ने दिया हक़ औरत और मर्द है बराबर
एकसे नुत्फ़ेसे हुए ख़ल्क नही औरत कमतर

दोनोंके एकसे हुक़ूक़ अलग नही हुक्मे इलाही
छुपाने हक़ कमज़र्फ़ मर्द ज़ाया करते स्याही

औरत को दबाने सताने का ढूंढ लिया हथियार
जो खोले ज़ुबान नामर्द करते सरे आम बलात्कार

बचा नही कोई कोना मचा ना हो जहा हाहाकार
क्यो अब सहे मज़लूम ज़ालिमोंका घोर अत्याचार

वक़्त आ गया अब खुलकर बहने करे गहरा प्रहार
गहरी नींदमें खोए कानून को जगाने जरूरी प्रचार

ज़ुल्म सहना भी बड़ा गुनाह आपके हाथ है चमत्कार
लोक लाज त्याग कर करे निशानदेही ना बने लाचार

ना कर सके आपकी हिफ़ाजत पलट दो ऐसी सरकार
इंसानियत पर कालिख़ पोते अब्बास दे उन्हें धुत्कार



Dedicated to
Nadia Murad and Denis Mukwege

Dedication Summary
For their brave work for rape victims

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