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चाँद की चोरी

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20 -Sep-2016 Anupama Gupta Kesharwani Moon Poems 0 Comments  1,075 Views
Anupama Gupta Kesharwani

मेरी बालकनी का चंदा
रोज़ शाम को आता
उसको अपनी मुठ्ठी में ले
मैं निंदिया सो जाता।

सुबह-सकारे जब मैं उठता
नज़र नहीं वह आता
कोई चोरी उसकी करता
या कोई धमकाता!

कोई तारा अपनी गर्मी
से उसको पिघलाता
या सुबह का सूरज उसको
रोज़ डाँट पिलाता?

या फिर दूर देश का बच्चा
अपने पास बुलाता
आँख झपकते ओझल होता
अंबर वहाँ सजाता?

छोटी सी है बात मगर
मुझको न कोई बताता
मेरी बालकनी का चंदा
क्यों गायब हो जाता?

चाँद की चोरी


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