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चन्दा मामा / Chanda Maama

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19 -Jul-2018 Suresh Chandra Sarwahara Moon Poems 0 Comments  892 Views
Suresh Chandra Sarwahara

रोज रात को चन्दा मामा
ढुलका कर किरणों की गागर,
तम में डूबी धरती माँ का
कर देते हैं रूप उजागर।
सब कुछ होता उजला उजला
मौसम होता बड़ा सुहाना,
खुले गगन में लगता अच्छा
झिलमिल तारों का मुस्काना।
नहा चाँदनी में जाते हैं
पेड़ धरा के सोये सोये,
शीतलता के बीजों को ही
चन्दा ने कण कण में बोये।
नहीं एक - से रहते मामा
प्रतिदिन ही तो घटते बढ़ते,
नाप रहे हैं नभ की दूरी
शीत ग्रीष्म वर्षा से लड़ते।
जब सारी दुनिया सोती है
चन्दा मामा रहते जगते,
नहीं भोर होने से पहले
काम छोड़ अपना वे भगते।
चन्दा मामा कहते हमसे
खुशी और को देते रहना,
इस परिवर्तनशील जगत में
सारे दुःख हँस हँस कर सहना।
******
- सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"



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