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छिप नही सकते तुम / chhip nahi sakte tum kahi

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23 -May-2020 shalu L. Spiritual Poems 0 Comments  449 Views
छिप नही सकते तुम  / chhip nahi sakte tum kahi

छिप नही सकते तुम
कही सृष्टी के रचयिता
छवि तुम्हारी हर कही है
क़ुदरत की क्यारी में
रहमतो की बारी में
फूलों के खिलने में
बारीश के बरसने में
मौसम के बदलने में
धरती के उगम में
बादलो के गगन में
ख़िलखिलाते आंगन में
ध्वनि के प्रांगण में
हवाओं के ज़ोर में
पंशियो के शोर में
प्रभात की भोर में
रंगों से भरे मोर में
नदियों की लहरों में
समंदर के गहेरो में
इन्सानी चहरों में
ब्रम्हांड के घरों में
पहाड़ों की ऊँचाई मे
खूब गहरी खाई में
ठंड की रजाई में
दुवा ओर दवाई में
पानी की मिठास में
कल की आस में
तुमपर बने विश्वास में
गोपियों संग की रास में
तुम्हारे होने के एहेसास में
जीवन देन तुम्हारी पालनहार
रखो हमेशा हमे अपने पास में।



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