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Chhota Shahar

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31 -Aug-2016 Raman City Poems 0 Comments  881 Views
Chhota Shahar

लफ़्ज़ों का काफिला चला है आज छोटे शहरों के दौरे पे…
ज़िन्दगी बँटी नही होती जहां किस्तों पे..

वक़्त जहां अपने धीमेपन से दिल्लगी करता है..
विविध भारती का स्वदेश वाला धुन लोगों के जुबान पे आज भी बसता है….

जहां हर दूसरे चौराहे पे लड़को का झुण्ड गर्ल्स स्कूल की छुट्टी होने की राह तकता है…..
नुक्कड़ों पे जहाँ आज भी तास के पत्तो का जौहर दिखाई पड़ता है..

ठंडी सुबह का अखबार…. रेडियो पे गाने और मीठी धूपकी चाय,
बगल की छत वाली पुष्पा और उसको वो कहना “हाय”

लिट्टी चोखा, बैगन का भरता और धुंए की सोंधी महक…
कुहांसे भरी सड़के, ओस की वो बूँदें और पत्तो के कोरों से उनका गिरना…टप टप टप…

मम्मी के हाथ में ऊन की वो लटाइयां….
मोहल्ले भर की औरतें और सास बहु की कहानियाँ…

पहली बैटिंग के लिए बच्चों की उस टीम में झगड़ा….
फिर बैट के मालिक के भाग जाने की धमकी…थोड़ा सुलह थोड़ा रगड़ा….

पान की गुमटियों पे जहां लालू-मोदी की सरकार बनायीं गिरा दी जाती है..
वही बगल में, भिन्डी खरीदने में २ रूपये कम करने को घंटो मगजमारी की जाती है..

पढाई के अलावा कुछ भी करने वाला बच्चा नालायक समझा जाता है…
शर्माजी का होशियार बेटा यही पे सबसे बाजी मार ले जाता है.
आई आई टी / आई ऐ एस तो छोड़ो,
टट्टू सी बाबू की नौकरी पाके ही,
मोहल्ले की सबसे ख़ूबसूरत लड़की ब्याह ले जाता है…

पड़ोस के लड़के की बढ़ी सैलरी कई घरो का चूल्हा बंद करा देती है..
और उसी के बहन के प्रेम प्रसंग की कहानिया उदास चर्चो में रंग भर जाती है..

जहां बस गाड़ियां नही, मवेशी भी जाम लगा जाते है..
आर्डर क्या हे, यूँ ही पांच आठ तल्ले बन जाते है..

दिन के वक़्त आसमान उड़ते मचलते पतंगों से भरा होता है…
अँधेरी रातो में वही क्षितिज तारो से लदा होता है..

कभी वो पिली छाली नही खाई हो….
ठंडी के धुप में लट्टू न नचाई हो…
नदी के लेहरो से कभी दोस्ती ना हुई हो…
छत पे लेटे लेटे तारों की रेल न बनाई हो…
फुर्सत के गन्ने नही चखे हो कभी…
बिन बुलाई शादी में शामिल न हुए हो कभी…
तो शगुन समझे या कहे इसको एक संदेसा…..
जो अपने खोया है…उसको पा लो अभी….

उड़ते धुल से सनी सड़के आपका इंतज़ार कर रही है…
पके आम और कच्ची इमली आपको याद कर रही है..

जब आप लौटेंगे आप उधर से तो ये भागमभाग बेमानी लगेगी…..
इस आपाधापी में जो खालीपन सा बन गया था….वो अंजानी लगेगी..
खुद से – लोगो से जो “कनेक्शन” आप भूल गए थे….
वो एहसास फिर से सयानी लगेगी….



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