Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

बिते कल का फ़साना......!!

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11 -Jan-2020 pravin tiwari Childhood Poems 0 Comments  113 Views
बिते कल का फ़साना......!!

गुज़रे दौर का, वो गुजरा जमाना...... याद आता है, बिते कल का फ़साना...... जहां इंसान भी थे, और इंसानियत भी, दिलों में रहता था, बस प्यार का तराना...... ख्वाहिशे कम थी, और ना जरूरतें ज्यादा, जितना मिले उतने में, खुश रहता घराना...... पाप

आंगन....

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15 -Dec-2019 Kamaal Neeraj Childhood Poems 0 Comments  33 Views
आंगन....

आंगन जिस में गुजरा बचपन सारा खेलते-खाते हम वो जन्नत सी जमीं का टुकड़ा छोड़ आए हैं। अरे होते होगें कहीं आलीशां आशियाने आपके हम तो खुशबू से भरा मिट्टी का महल छोड़ आए हैं। रास नहीं आते ये स्कूली शिक्षा के तौर तरीके ह

वो मोहब्बत गई, वो फसाने गए...

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28 -Sep-2019 Suman Kumari Childhood Poems 0 Comments  216 Views
वो मोहब्बत गई, वो फसाने गए...

वो मोहब्बत गई , वो फसाने गए.., जो खजाने थे अपने खजाने गए चाहतों का वो दिलकश जमाना गया... सारे मौसम थे कितने सुहाने गए..!! रेत के वो घरौंदे कहीं गुम हुए.. अपने बचपन के सारे ठिकाने गए...!! वो गुलेले तो फिर भी बना ले मगर.. अब वो नज

दो पंख मुझे भी होते काश

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13 -Aug-2019 Riju Bhasker Childhood Poems 0 Comments  164 Views
दो पंख मुझे भी होते काश

दो पंख मुझे भी होते काश , जाता सागर के उस पार , मधुर गगन में गोते खाता , और समुन्दर पे लहराता , नहीं कही कोई रोक लगाता , नहीं कहीं भी पकड़ा जाता . बादल के आगे मैं जाता , सूरज को छू कर मैं आता , चाँद की धीमी धूप छान कर , अपने अंज

Mungfali: A Lore

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24 -Jun-2019 Alok Pratap Singh Childhood Poems 0 Comments  269 Views
Mungfali: A Lore

पहाड़ों की वो सर्द भरी रातें, फिर से याद आयी। रातें  जो परिवार संग हमने बिताई। मूँगफली की दावत मिलके हमने उड़ाई, ओढे अपनी- अपनी रज़ाई। फटाक फटाक का गुँजन ही, देता था केवल सुनाई। तीन दाने आये तो झूम कर खुशियाँ मनाई, निक

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