वो भी क्या दिन थे

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13 -Nov-2017 Thakur Gourav Singh Childhood Poems 2 Comments  121 Views
वो भी क्या दिन थे

वो भी क्या दिन थे यारों ना आज की थी फिक्र ना ही कल का जिक्र ज़िन्दगी को असल में जिया करते थे हम अब तो ऐसा लगता है चंद सीकों में ज़िन्दगी लिपट के रह गयी है ज़िन्दगी के मायने बदल गए यहाँ तो कुछ पुराने रिश्ते भी बदल गए अगर प

देश के भविष्य

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11 -Nov-2017 Sushil Kumar Childhood Poems 5 Comments  5,267 Views
देश के भविष्य

तु देश का भविष्य है, ऐ कैसा तेरा भेष है, जिस कंधों पर होना चाहिए बस्ता, उस कंधों पर कितना बोझ है !! तु उन चारदीवारों से क्यों दूर है, शिक्षा की मन्दिर से कहां गुम है, जिस हाथ में होना चाहिए कलम, उस हाथ को चाय बेचने का काम

NATKHAT BACHPAN

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06 -Sep-2017 RAMESH BISHT Childhood Poems 0 Comments  261 Views
NATKHAT BACHPAN

NATKHAT BACHPAN Main Omi main hoon Bachpan Naachu mei bas cham chamm chamm chamm Dekh paani Karun Chappp Chappp Sharaaten din bhar mujhe sujati Maa Meri bas mujhe Dhundti Kabhi Iss kone Kabhi Uss Kone Mei Chup Jaata Pankh Laagayen mei Udd Jaaataa Dada Kandhe Par Ghumaayen Didi Mujhe Paas Apne Bulaayen Main Kisi Ke Haath Naa AAtaa Main Omi Main Hoon Bachpan

मम्मी पापा और बचपन

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23 -Jun-2017 Kamlesh Sanjida Childhood Poems 0 Comments  1,097 Views
मम्मी पापा और बचपन

काश मुझे ये बचपन , फिर से मिल जायें और जीवन का , ये मतलब समझ में आ जायें । अपने पराये से, चलो कुछ दूर हो जायें और बचपन में जाकर, कुछ तो कर जायें । वो तुतली-२ बातें, और फिर खो जायें और आँख बंद हों, और सपनों में खो जायें । वो

माँ !

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14 -Jun-2017 Gianchandsharma Childhood Poems 0 Comments  287 Views
माँ !

अब देर से घर नही आऊंगा मैं वर्ना दरवाजा खोलेगा कौन? वो माँ ही थी जो दरवाजा खोलती थी और सारा घर रहता था मौन !! कठोर चीजों को ठोकर नहीं मारूँगा अब वर्ना दर्द पांव का सहलाएगा कौन ? वो माँ ही थी गले लगा माथा चूमती और बिठात

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