Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वो मोहब्बत गई, वो फसाने गए...

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28 -Sep-2019 Suman Kumari Childhood Poems 0 Comments  166 Views
वो मोहब्बत गई, वो फसाने गए...

वो मोहब्बत गई , वो फसाने गए.., जो खजाने थे अपने खजाने गए चाहतों का वो दिलकश जमाना गया... सारे मौसम थे कितने सुहाने गए..!! रेत के वो घरौंदे कहीं गुम हुए.. अपने बचपन के सारे ठिकाने गए...!! वो गुलेले तो फिर भी बना ले मगर.. अब वो नज

दो पंख मुझे भी होते काश

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13 -Aug-2019 Riju Bhasker Childhood Poems 0 Comments  139 Views
दो पंख मुझे भी होते काश

दो पंख मुझे भी होते काश , जाता सागर के उस पार , मधुर गगन में गोते खाता , और समुन्दर पे लहराता , नहीं कही कोई रोक लगाता , नहीं कहीं भी पकड़ा जाता . बादल के आगे मैं जाता , सूरज को छू कर मैं आता , चाँद की धीमी धूप छान कर , अपने अंज

Mungfali: A Lore

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24 -Jun-2019 Alok Pratap Singh Childhood Poems 0 Comments  232 Views
Mungfali: A Lore

पहाड़ों की वो सर्द भरी रातें, फिर से याद आयी। रातें  जो परिवार संग हमने बिताई। मूँगफली की दावत मिलके हमने उड़ाई, ओढे अपनी- अपनी रज़ाई। फटाक फटाक का गुँजन ही, देता था केवल सुनाई। तीन दाने आये तो झूम कर खुशियाँ मनाई, निक

प्यारा बचपन

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28 -Apr-2019 Naveen Kumar Childhood Poems 0 Comments  173 Views
प्यारा बचपन

समय की बहती धारा में, गुम हुए हमारे अलहरपन। चलो ढूँढ़कर लाते हैं, फिर से अपना प्यारा बचपन ।। गुड्डे-गुड़ियों की शादी में, हम रहते थे बेफिक्र मगन। कागज की कस्ती हाथ लिए, ख्वाबों से भरे बेबाक नयन ।। चलो ढूँढ़कर लाते

ढलता बचपन

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06 -Feb-2019 Divya Raj kumar Childhood Poems 0 Comments  489 Views
ढलता बचपन

आ फंसे किस दलदल में अनजान मोड़ो पर जिन्दगीं के कशमकश में गुम हो गए काश...! जिन्दगीं उस पन्ने को एक दफा और दोहरा जाए बचपन के उस सुनहरे सफर का फिर दर्पण दिखला जाए काश....! समेंट लूँ फिर से वो नमकीन यादों के पुल उसमे घुली मि

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