Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वो मेरा बचपन

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01 -Jan-2022 barish Childhood Poems 0 Comments  25 Views
वो मेरा बचपन

मुझे अपनी गोद में फिर से सुला दे माँ, अपनी बाहों के झूले में फिर से झुला दे माँ, बनना चाहती हूँ मैं तेरे बाग़ की वही नन्ही सी कली, फिर से अपनी बगिया में मुझको खिला दे माँ, खेलना चाहती हूँ मैं फिर से भैया के साथ, मुझे फिर

सब कुछ याद है मुझे।

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03 -Dec-2021 ताज मोहम्मद Childhood Poems 0 Comments  49 Views
सब कुछ याद है मुझे।

एक दिन एकान्त में बैठा था मैं कुछ चिंतन में, सब कुछ शांत था पर मन मेरा कुछ अशांत था। अचानक स्मृति बचपन की याद आयी मेरे ओठों पर यूँ ही इक मुश्कान छाई वो बेफिक्री का होना दिन भर मित्रों संग घूमना। सब कुछ मूझे याद है, क

अच्छा नहीं लगता

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08 -Jul-2021 शिवाजी Childhood Poems 0 Comments  340 Views
अच्छा नहीं लगता

अब तुम्हारे साथ वक्त बिताना अच्छा नहीं लगता,तुम्हें प्यार से गले लगाना अब अच्छा नहीं लगता, सुना हूं आ गया है कोई रकीब तुम्हारी जिंदगी में,मुझे उससे छिपकर तुमसे मिलना अच्छा नहीं लगता, हाल-ए-दिल बयां करना तुम्हारे

बचपन के दिन

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22 -Jun-2021 राजेश्वरी पंत जोशी Childhood Poems 0 Comments  414 Views
बचपन के दिन

बचपन के वो दिन बचपन के वो दिन कितने अच्छे थे. बेफ्रिकी के वो दिन कितने अच्छे थे. ना था कोई डर ,ना खतरे थे. कितने खुश थे, जब हम बच्चे थे. इतने भारी भी कब, हमारे बस्ते थे, लड्डू भी तब, कितने सस्ते थे. नानी के किस्से, भी कितने

आंहरा बचपन

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19 -Jun-2021 Vikash Dhiman Childhood Poems 0 Comments  409 Views
आंहरा बचपन

आज कविता ले चली मुझे उस पल वहां,  फेसबुक व्हाट्सएप ना था जहां।  मुंह पर करते सभी बातें,  रिप्लाई का इंतजार ,  यहां होता कहां ? १) कद छोटा, पर बातें बड़ी किया करते थे।  बिना ईंटों का महल, हम हवा में बनाया करते थे। वैट, कंच

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