Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

वो बचपन के दिन कुछ और थे,

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25 -Apr-2020 Narendra Aherwar Childhood Poems 0 Comments  284 Views
वो बचपन के दिन कुछ और थे,

वो बचपन के दिन कुछ और थे, कभी उंगलियों से उड़ाया करते थे चिड़िया, तो कभी चोर, सिपाही, राजा, रानी बन जाया करते थे, वो बचपन के दिन कुछ और थे, कभी दीवारों की और देखकर गिनतियां गिनाकरथे थे, तो कभी जमीन पर लकीरे बनाया करते थे,

Meri Priya Mitra

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11 -Apr-2020 Shirshika Kaurav Childhood Poems 3 Comments  511 Views
Meri Priya Mitra

Kitabain meri priya mitra, Inme sara gyan chupa | Kitaboain ko mai padati hu, Inme sara rahasya chupa | Thoda kuch ab jan gayee, Bacha abhi hai janana baki | Ma kahti hai kitabon se pyar karo, Sachche dil se padhai karo | Inko apana mitra bana lo, Sari muskilo ka hal nikal lo | Dheere dheere ye meri mitra ban rahi hai, mere dil ke kareeb aa rahi hai |

बच्चे

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03 -Apr-2020 Suresh Chandra Sarwahara Childhood Poems 0 Comments  113 Views
बच्चे

बच्चे _____ छल छन्दों से सदा दूर जो मन के होते बिल्कुल सच्चे, खुशियों का ही नाम दूसरा होते हैं सचमुच में बच्चे। नहीं लोभ या लालच इनमें भेदभाव को नहीं जानते, सब इनको अपने - से लगते ये जग को परिवार मानते। नहीं निराशा कभी

सन 90 का बचपन

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10 -Feb-2020 Ankita Singh Childhood Poems 0 Comments  699 Views
सन 90 का बचपन

घर की मुंडेर पर , पंछी सा चहचहता था बचपन I आंगन की दहलीज पर, घुटनो के बल लोट जाता था बचपन I तुतली जुबां से , मिट्टी के लड्डू चख जाता था बचपन I कागज की नाव में, ख्वाबो को पार लगाता था बचपन I आम की डाल पर, मर्कट सी छलांग लगाता

बिते कल का फ़साना......!!

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11 -Jan-2020 pravin tiwari Childhood Poems 0 Comments  360 Views
बिते कल का फ़साना......!!

गुज़रे दौर का, वो गुजरा जमाना...... याद आता है, बिते कल का फ़साना...... जहां इंसान भी थे, और इंसानियत भी, दिलों में रहता था, बस प्यार का तराना...... ख्वाहिशे कम थी, और ना जरूरतें ज्यादा, जितना मिले उतने में, खुश रहता घराना...... पाप

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