Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Bachpan ( बचपन )

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12 -Oct-2018 Archie Childhood Poems 0 Comments  389 Views
Bachpan ( बचपन )

*_Bachpan_* उल्टे पैरों में चप्पल पहनना हर किसी को याद होगा माँ के हाथों वाला मीठा करेला हर किसी को याद होगा डाँट के आभास से कोने में छिपना हर किसी को याद होगा ही। वक्त का मतलब तो बस घड़ी का मोटा काँटा होता था याद तो होगा ह

चिंता

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05 -Aug-2018 nil Childhood Poems 0 Comments  327 Views
चिंता

बोल गया कागा मुंडेर पर शायद घर आयेगा ललना रोटी रोजी के चक्कर में देश छोड़ परदेश गया घर आँगन खलिहान खेत को 'रामभरोसे' सौंप गया जिससे पूछो वो ही कहता सूने खेत गाँव घर अंगना ! जब से गया न चिठिया भेजी जाने कैसे रहता है? कब

लोरी / Lullaby

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21 -Jul-2018 nil Childhood Poems 0 Comments  487 Views
लोरी / Lullaby

लोरी अगडम बगडम बगडम अगडम दुनिया दौड़े लईयां पईयाँ/तुम भी दौड़ो पैयाँ पैयाँ समझो लैपटॉप मोबाइल /जहाँ जरूरत करलो डायल खूब भिड़ाना इकदिम तिकदिम गहरी निदिया तगदम जकदम/ रात तरैया ताल तरैया अंखियाँ भूली राग तरुन्नम/पलक

मरता हुआ बचपन

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06 -Jun-2018 Suresh Chandra Sarwahara Childhood Poems 0 Comments  583 Views
मरता हुआ बचपन

बोतल जल की बस्ता भारी ढोना बच्चों की लाचारी, होमवर्क तो करना ही है फिर ट्यूशन की भी तैयारी। खेलकूद से दूर हुआ मन, बच्चों का मरता है बचपन। मम्मी कहती कहीं न जाना जल्दी जल्दी खाओ खाना, बाहर के बच्चों से घुलमिल अब ना त

खुला निमंत्रण

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05 -Jun-2018 Jaijairam Anand Childhood Poems 0 Comments  367 Views
खुला निमंत्रण

डाँ. आनंद का गीत खिड़की से जब बाहर झाँकों दिल दिमांग की खिड़की खोलो झूम रहे तरुवर tतो निरखो हवा झुलाती झूला परखो खुशियाँ लूट रहे जी भरके तुम भी उनमें शामिल हो लो .... कहीं कहीं मैदान उघारे कहीं बस्तियाँ पाँव पसारे खुला

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