Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

घन  घोर अँधेरा छाया है

0
19 -Apr-2020 Sandeep Kumar City Poems 0 Comments  297 Views
घन  घोर अँधेरा छाया है

घन घोर अँधेरा छाया है जिसने हम सबको घेरा है कुछ नज़र आता ही नहीं कुछ समझ आता ही नहीं कोई राह सुझाता ही नहीं कोई भेद बताता ही नहीं कोई जान पाता ही नहीं क्या अब होने वाला है कैसा ये समय निराला है कैसा ये बदल छाया है क्य

I love udaipur

0
06 -Feb-2020 Ajit Dubey City Poems 0 Comments  290 Views
I love udaipur

Ruth kar apno se chala jata hu door ... Jab yaad aati he apne sahar ki To fir jata hu mud.... Pohch kar apni zami par niklta h Dil se ek hi sur...... I love udaipur I love udaipur I love udaipur

भोपाल शहर

0
09 -May-2019 nil City Poems 0 Comments  493 Views
भोपाल शहर

ये शहर बड़ा नमकीन है ! सुबह शाम पतियों पर बैठे पोहा जलेबी खाकर ऐंठे इसका मिज़ाज रंगीन है ... मिलजुल सब त्यौहार म्क्नाता भेभाव को दूर भागता गीता कुरान शौक़ीन है ... शैल शिखर सब ताल -तलैया हर मौसम का सुखद रवैया रहता न कभी ग़म

हाँ, हम झारखंडी है ...

1
15 -Oct-2018 Piyush Raj City Poems 0 Comments  1,334 Views
हाँ, हम झारखंडी है ...

_"वैसे तो हम सब हिंदुस्तानी है ,पर ये कविता इसलिए लिखा हूँ क्योंकि जब झारखंड के लोग दूसरे राज्य जाते है तो वहां उनका वेश-भूसा ओर बोली का लोग मजाक उड़ाते है ,बहुत से लोग दूसरे राज्य में ये बोलने में शर्माते है कि वे झा

अगर कोई पड़ोसी मिले मेरे जेसा

0
05 -Aug-2018 Bipin verma City Poems 0 Comments  1,158 Views
अगर कोई पड़ोसी मिले मेरे जेसा

#अगर_कोई_पड़ोसी... घर को आबाद करने निकला हूँ पर खुद घर से बेघर हो चुका हूँ मैं घर का ज़िम्मेदार लड़का हूँ थोड़ा समझदार लड़का हूँ घर का थोड़ा ज़िम्मा मुझपर भी है इसलिए घर छोड़के निकला हूँ बहुत ख़ुशनसीब होते हैं वो लो

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017