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Shahar

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27 -Jan-2015 Yatish Bhaskar Agnihotri City Poems 0 Comments  1,345 Views
Yatish Bhaskar Agnihotri

शहर की इस हवा में , ये कैसा झोलझाल है
कहीं बहुत ख़ुशी का , तो कहीं गम का माहौल है
कोई रोज आँसु नयी, खुशियों की इबारत कहता है
तो कहीं चल झरने सा गम आकर, बेपरवाह बहता है
किसी दरख़्त के नीचे यूँ , कुछ नए से सपने पलते हैं
तो कहीं मौत की आगोश में, कुछ बिखरे तन जलते हैं
कुछ को गुजरी रातें यूँ , एक नया सबक सिखाती हैं
तो कुछ की बीती बातें ही, एक नया सबक बन जाती हैं
शहर की इस हवा में , ये कैसा झोलझाल है
कहीं बहुत ख़ुशी का , तो कहीं गम का माहौल है



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