Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Common girl

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06 -Jan-2022 zehra Ocean Poems 0 Comments  274 Views
Common girl

मै थोड़ी अजीब हूँ, फिर भी कितनी common हूँ,,
बाते थोड़ी बच्चो जैसी करती हूँ, फिर भी लोगो को खटकती हूँ,
कुछ तो बात है, जो इतनी अलग हूँ,
कितने लोगो को पसंद भी हूँ, और कितनो को नही.....
थोड़ी ज़िद्दी हूँ, थोड़ी पागल हूँ,
क्या करू हूँ ही मै थोड़ी अजीब,, फिर भी कितनी common हूँ,
लोगो जैसी हूँ, पर उनसे अलग हूँ,,
बाते तो सारे अच्छे करते है, कौन कितना अच्छा है, ये तो उनकी फितरत बताती है,
जो जैसा है, उनके लिए वैसी ही हूँ, उनकी बातो का कभी mind नही करती,
क्योंकि हूँ मै थोड़ी अजीब, फिर भी कितनी common हूँ,,
अपने जज़्बातों को side मे रख कर, दुसरो को खुश रखने का जज़्बा रखती हूँ,,
हर वक़्त मुस्कुरा कर ज़िंदगी का मज़ा लेती हूँ,
अपने feelings को जाहिर नही करती कभी, फिर भी कोई शिकायत नही,
शायद मुझे खुद की feelings जाहिर करने नही आती,
सबकी तरह ठीक हूँ, मुझे क्या परेशानी है, ये कह कर बाते टाल देती हूँ,
किसी को मायुस करके मुझे जीना नही आता,
क्या करू मै हूँ ही थोड़ी अजीब, फिर भी कितनी common हूँ,
थोड़ी emotinal हूँ, ये दिखाती नही, क्या है ना लोग जज़्बातों को समझते कहा है,
क्या करू थोड़ी झल्ली सी हूँ,
Common हूँ फिर भी कितनी अलग हूँ,
लोग अक्सर पागल कहते,
पर उन्हे क्या मालूम पागलपन भी एक जुनून है,
थोड़ी बिगड़ी ख्याल, और दिल की साफ हूँ,
पर लोगो के नजरो मे, थोड़ी अजीब हूँ,
क्या करू थोड़ी common हूँ ना,
हर किसी की बस की बात नही है, मुझे समझने की,
समझना दूर की बात, मुझे जान जाओ, इतना ही काफी है,
क्योंकि मै थोड़ी अजीब हूँ, फिर भी common हूँ,



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