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कोरोना काल में वियाह

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22 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Natural Disasters Poems 0 Comments  596 Views
कोरोना काल में वियाह

एहि महीना में वियाह रहल और मन में कल्पना अथाह रहल।
चढ़ि जयति डोली जल्दी तेल्हई के बस इहे चाह रहल।
आइल कोरोना सब चौपट कइले सगरो सपना अब टूट गइल,
सोच के ई पगलाइल तेल्हई अंखिया में धारा के प्रवाह रहल।
चढ़ि जयति डोली जल्दी तेल्हई की बस इहे चाह रहल।।
तरह तरह के बात चलल केहू कहलस रणुअन के आह रहल।
तैयारी में पैसा फुकले बहुत और खरचा से तबाह रहल।
कपरा फोड़े के दौड़ परल कैसो भजुआ के जान बचल,
तेल्हई से उ जे पूछ लिहले के करे तेर त वियाह रहल।
चढ़ि जयति डोली जल्दी तेल्हई की बस इहे चाह रहल।

और देखा विजया स्वर्णा कोरोना में हरदी चाहत बा।
पैदल भी रछहर घूम लेइ दुलहा के वरदी चाहत बा।
खैर भस्मा के डीह बाबा कृपा करेलें पुरायठन पर,
केहू अगुआ एहू के कल्याण करें अब उनही के मरजी चाहत बा।

- सिद्धार्थ



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