Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मेरा गांव

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07 -Feb-2021 bharat Countryside Poems 2 Comments  1,119 Views
मेरा गांव

मेरा गांव (कितने हसीन थे) कच्ची दीवारों पर छप्पर पड़े थे... थे घर छोटे छोटे पर दिल के बड़े थे... वो आमों की बगीयां वो सावन के झूले.. वो कपड़े की गेंदें और लकड़ी के टोले.. पनघट पर सखियां हंसी के ठिठोले.. थे कंकड़ के गुटके और

आगे बढ़ना हैं..

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04 -Jan-2021 Jugal Milan Countryside Poems 0 Comments  746 Views
आगे बढ़ना हैं..

हम देश के लिए जीते हैं और देश के लिए मरते हैं देश से बढ़कर किसी को हम कुछ नहीं समझते हैं हम धर्म के लिये जीते है और अधर्म को मिटाते हैं सबका मान सम्मान कर देश की लाज बचाते हैं जागते हैं या सोते हैं देश में ही खोये रहते

मजदूरों का दर्द एक चेतावनी

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17 -May-2020 निशंक Countryside Poems 0 Comments  573 Views
मजदूरों का दर्द एक चेतावनी

मन द्रवित है मौन हूँ फिर भी ह्रदय यह बोलता है रक्त रंजित इन पगों से महीमण्डल डोलता है इस व्यथा इस वेदना को देखकर भी मूक हैं जो क्यों न उनका रक्त आंशिक रूप से भी खौलता है मूढ हैं जो आज फिर से उनको मैं चेतावनी दूं ध्या

कोरोना से डरो ना

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05 -May-2020 sumit jain Countryside Poems 0 Comments  713 Views
कोरोना से डरो ना

सभी जगह एक ही बात कोरोना कोरोना स्कूल की होगई छूटी छूटी डरो ना डरो ना कोरोना से नहीं होना है भयभीत भयभीत डरो ना डरो ना कोरोना कोरोना डरो ना डरो ना कोरोना से डरो ना डरो ना (2) घर में ही मजे करोना करोना डरो ना डरो ना हाथ

Mera hindustan

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19 -Apr-2020 Shirshika Kaurav Countryside Poems 0 Comments  343 Views
Mera hindustan

Ekta ke deep jalakar lado naya vihan, Bharat ma ki laj bachane jago hindustan || Purav paschim uttar Dakshin kola har atanko ka, Jag shant karna hoga jat pat ke danko ka || Sara bhrishtachar mita do Bharat Ki is bhoomi se, Prem ke mehetve ko bikher do apne dil ki gunjan se || Swatantrata pukar rahi hai aaj hame hamare balidano ko, Awaz laga rahi pradushan se chutkara pane ko || Aaj Iss Swatantrata diwas ke awsar par hum pratigya karte hai, Hum apne desh ko swach, pavitra aur Nirmal banaenge ||

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