Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

काम के वक्त उम्मीद

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07 -May-2022 Vikram Countryside Poems 0 Comments  29 Views
काम के वक्त उम्मीद

जब घर के सारे जन लगे हों काम पर ढोने कनक थ्रैशर तक किसी एक जन का घर पर बैठा रहना उस वक्त उसे भी अजीब लगता है उसे और भी अजीब तब लगता है जब सीना निकाले निकलते जाते लोग उसके सामने से बात नहीं करते बात करने की स्थिति में ह

मैं ना तो बहुत मेहनती लोगो में

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10 -Apr-2022 Megha Raghuwanshi Countryside Poems 0 Comments  23 Views
मैं ना तो बहुत मेहनती लोगो में

मैं ना तो बहुत मेहनती लोगो में ना नाकारों में आता हूं मैं ना तो बहुत पैसे वाले लोगो में ना एकदम से फकीरों में आता हूं मैं ना तो लोगो के ख्यालों में ना शायद दिलो में आता हूं मैं ना तो उठे हुए लोगो में ना एकदम से गिरे ह

अलबेला मगही

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05 -Mar-2022 अलबेला मगही Countryside Poems 0 Comments  205 Views
अलबेला मगही

क_ काम भर ख_खेलबै ग_गाली कबो न देवै घ_से घरे समय पर जैबई ड़_ से कुछ न होतै च_से चलबै रोड के बाई ओर छ_से छतरी लगा के ज_से जैबई पढ़े असकुलिया झ_से झगरा न करबै ञ _से कुछ न होतै

मेरा गांव

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07 -Feb-2021 bharat Countryside Poems 2 Comments  1,435 Views
मेरा गांव

मेरा गांव (कितने हसीन थे) कच्ची दीवारों पर छप्पर पड़े थे... थे घर छोटे छोटे पर दिल के बड़े थे... वो आमों की बगीयां वो सावन के झूले.. वो कपड़े की गेंदें और लकड़ी के टोले.. पनघट पर सखियां हंसी के ठिठोले.. थे कंकड़ के गुटके और

आगे बढ़ना हैं..

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04 -Jan-2021 Jugal Milan Countryside Poems 0 Comments  850 Views
आगे बढ़ना हैं..

हम देश के लिए जीते हैं और देश के लिए मरते हैं देश से बढ़कर किसी को हम कुछ नहीं समझते हैं हम धर्म के लिये जीते है और अधर्म को मिटाते हैं सबका मान सम्मान कर देश की लाज बचाते हैं जागते हैं या सोते हैं देश में ही खोये रहते

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