Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दो शब्द लिखूं

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06 -Oct-2018 Naren Kaushik Countryside Poems 0 Comments  170 Views
दो शब्द लिखूं

दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै, सोने की चिड़िया कहलावै था ज्ञान की बारिश होया करै थी इस भारत देश मेरे मैं।२ स्वत: उपजते:भूमि जिसकी फलों की सारी किस्में जिसकी, दुध दही के खाण

खिड़की से जब झांको

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25 -Jul-2018 nil Countryside Poems 0 Comments  247 Views
खिड़की से जब झांको

डाँ. आनंद का गीत खिड़की से जब बाहर झाँकों दिल दिमांग की खिड़की खोलो झूम रहे तरुवर तो निरखो हवा झुलाती झूला परखो खुशियाँ लूट रहे जी भरके तुम भी उनमें शामिल हो लो .... कहीं कहीं मैदान उघारे कहीं बस्तियाँ पाँव पसारे खुला

डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ

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12 -Jun-2018 nil Countryside Poems 0 Comments  492 Views
डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ

डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ बहुत दिनोंके बाद मैं ,पहुंचा अपने गाँव सिसक सिसक रोने लगी ,नीम आम की छाँव नीम आम की छाँव ,सुनाने लगी कहानी बदल गई हर रीति ,गाँव में रहां न पानी सूरज अपने नाम ,लिखा लेता हर बोली खुलते जिसके ओ

अंतहीन सड़क

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25 -Apr-2018 Suresh Chandra Sarwahara Countryside Poems 0 Comments  257 Views
अंतहीन सड़क

गाँवों में बिछ गया सड़कों का जाल, कुछ तो बेघर हुए कुछ मालामाल। कटे पगडंडी के सारे ही पेड़, मिमियाती फिर रही अब बकरी भेड़। सिकुड़ते हैं जंगल फैल गए लोग, गाँवों को लग गया सुविधा का रोग। जीने के अकेले होकर अभ्यस्त, रह

गाँव की ओर

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15 -Sep-2017 Suresh Chandra Sarwahara Countryside Poems 0 Comments  390 Views
गाँव की ओर

गाँव की ओर ___________ चिड़िया आओ चलें आज फिर हम गाँवों की ओर, जहाँ नहीं है प्रदूषित वायु नहीं शराबा शोर। वहाँ नहीं शहरों जैसी भी होगी भारी भीड़, छप्पर वाले घर में तेरा बन जाएगा नीड़। हरियाले खेतों में जाकर जी भर चुगना धा

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