Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मजदूरों का दर्द एक चेतावनी

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17 -May-2020 निशंक Countryside Poems 0 Comments  289 Views
मजदूरों का दर्द एक चेतावनी

मन द्रवित है मौन हूँ फिर भी ह्रदय यह बोलता है रक्त रंजित इन पगों से महीमण्डल डोलता है इस व्यथा इस वेदना को देखकर भी मूक हैं जो क्यों न उनका रक्त आंशिक रूप से भी खौलता है मूढ हैं जो आज फिर से उनको मैं चेतावनी दूं ध्या

कोरोना से डरो ना

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05 -May-2020 sumit jain Countryside Poems 0 Comments  432 Views
कोरोना से डरो ना

सभी जगह एक ही बात कोरोना कोरोना स्कूल की होगई छूटी छूटी डरो ना डरो ना कोरोना से नहीं होना है भयभीत भयभीत डरो ना डरो ना कोरोना कोरोना डरो ना डरो ना कोरोना से डरो ना डरो ना (2) घर में ही मजे करोना करोना डरो ना डरो ना हाथ

Mera hindustan

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19 -Apr-2020 Shirshika Kaurav Countryside Poems 0 Comments  181 Views
Mera hindustan

Ekta ke deep jalakar lado naya vihan, Bharat ma ki laj bachane jago hindustan || Purav paschim uttar Dakshin kola har atanko ka, Jag shant karna hoga jat pat ke danko ka || Sara bhrishtachar mita do Bharat Ki is bhoomi se, Prem ke mehetve ko bikher do apne dil ki gunjan se || Swatantrata pukar rahi hai aaj hame hamare balidano ko, Awaz laga rahi pradushan se chutkara pane ko || Aaj Iss Swatantrata diwas ke awsar par hum pratigya karte hai, Hum apne desh ko swach, pavitra aur Nirmal banaenge ||

रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं...

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20 -Sep-2019 Suman Kumari Countryside Poems 0 Comments  608 Views
रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं...

रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं... अमरूद के बगीचे, वो पेड़ो की शीतल छाव छोड़ आईं हूं...!! फसलों से लहराते खेत, वो खेल का मैदान छोड़ आई हूं... शुद्ध हवा, वो पतंगों वाला व्यस्त आसमान छोड़ आईं हूं...!! वो मिट्ट

सर्जीकल स्ट्राइक और मोदी

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26 -Feb-2019 mannu bhai Countryside Poems 0 Comments  534 Views
सर्जीकल स्ट्राइक और मोदी

*सर्जिकल स्ट्राइक और मोदी* शोर मचाकर लगाकर नारे, करते थे जो हमले सारे मकबूल जवाब अब मिला है प्यारे, दिख गए दिन में तारे उगले न बने निगले न बने, आफत के है बादल घने कुचले जाएंगे सब नाग फने, चबा लिए लोहे के चने बुलंद हर न

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