Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं...

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20 -Sep-2019 Suman Kumari Countryside Poems 0 Comments  228 Views
रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं...

रहने को सपनों के शहर में, मै अपना गावं छोड़ आई हूं... अमरूद के बगीचे, वो पेड़ो की शीतल छाव छोड़ आईं हूं...!! फसलों से लहराते खेत, वो खेल का मैदान छोड़ आई हूं... शुद्ध हवा, वो पतंगों वाला व्यस्त आसमान छोड़ आईं हूं...!! वो मिट्ट

सर्जीकल स्ट्राइक और मोदी

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26 -Feb-2019 mannu bhai Countryside Poems 0 Comments  318 Views
सर्जीकल स्ट्राइक और मोदी

*सर्जिकल स्ट्राइक और मोदी* शोर मचाकर लगाकर नारे, करते थे जो हमले सारे मकबूल जवाब अब मिला है प्यारे, दिख गए दिन में तारे उगले न बने निगले न बने, आफत के है बादल घने कुचले जाएंगे सब नाग फने, चबा लिए लोहे के चने बुलंद हर न

गांव की परिभाषा!

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21 -Feb-2019 सुमित.शीतल Countryside Poems 0 Comments  892 Views
गांव की परिभाषा!

कविता: गांव की परिभाषा! पापा जी ये गांव कैसा होता है, बता दो, बड़ा उत्सुक हूं, हो सके तो जाकर दिखा दो। सुना है कि किसान वंहा पर फसले है उगाते, कैसे करते वो खेती, ये काम दिखा दो। कैसे गेंहू-चावल-गन्ना बोते है, ये सबकुछ भी

दो शब्द लिखूं

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06 -Oct-2018 Naren Kaushik Countryside Poems 0 Comments  340 Views
दो शब्द लिखूं

दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै, सोने की चिड़िया कहलावै था ज्ञान की बारिश होया करै थी इस भारत देश मेरे मैं।२ स्वत: उपजते:भूमि जिसकी फलों की सारी किस्में जिसकी, दुध दही के खाण

खिड़की से जब झांको

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25 -Jul-2018 nil Countryside Poems 0 Comments  413 Views
खिड़की से जब झांको

डाँ. आनंद का गीत खिड़की से जब बाहर झाँकों दिल दिमांग की खिड़की खोलो झूम रहे तरुवर तो निरखो हवा झुलाती झूला परखो खुशियाँ लूट रहे जी भरके तुम भी उनमें शामिल हो लो .... कहीं कहीं मैदान उघारे कहीं बस्तियाँ पाँव पसारे खुला

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