Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

गांव की परिभाषा!

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21 -Feb-2019 सुमित.शीतल Countryside Poems 0 Comments  1,595 Views
गांव की परिभाषा!

कविता: गांव की परिभाषा! पापा जी ये गांव कैसा होता है, बता दो, बड़ा उत्सुक हूं, हो सके तो जाकर दिखा दो। सुना है कि किसान वंहा पर फसले है उगाते, कैसे करते वो खेती, ये काम दिखा दो। कैसे गेंहू-चावल-गन्ना बोते है, ये सबकुछ भी

दो शब्द लिखूं

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06 -Oct-2018 Naren Kaushik Countryside Poems 0 Comments  630 Views
दो शब्द लिखूं

दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै, सोने की चिड़िया कहलावै था ज्ञान की बारिश होया करै थी इस भारत देश मेरे मैं।२ स्वत: उपजते:भूमि जिसकी फलों की सारी किस्में जिसकी, दुध दही के खाण

खिड़की से जब झांको

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25 -Jul-2018 nil Countryside Poems 0 Comments  502 Views
खिड़की से जब झांको

डाँ. आनंद का गीत खिड़की से जब बाहर झाँकों दिल दिमांग की खिड़की खोलो झूम रहे तरुवर तो निरखो हवा झुलाती झूला परखो खुशियाँ लूट रहे जी भरके तुम भी उनमें शामिल हो लो .... कहीं कहीं मैदान उघारे कहीं बस्तियाँ पाँव पसारे खुला

डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ

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12 -Jun-2018 nil Countryside Poems 0 Comments  845 Views
डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ

डॉक्टर आनंद की कुण्डलियाँ बहुत दिनोंके बाद मैं ,पहुंचा अपने गाँव सिसक सिसक रोने लगी ,नीम आम की छाँव नीम आम की छाँव ,सुनाने लगी कहानी बदल गई हर रीति ,गाँव में रहां न पानी सूरज अपने नाम ,लिखा लेता हर बोली खुलते जिसके ओ

अंतहीन सड़क

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25 -Apr-2018 Suresh Chandra Sarwahara Countryside Poems 0 Comments  560 Views
अंतहीन सड़क

गाँवों में बिछ गया सड़कों का जाल, कुछ तो बेघर हुए कुछ मालामाल। कटे पगडंडी के सारे ही पेड़, मिमियाती फिर रही अब बकरी भेड़। सिकुड़ते हैं जंगल फैल गए लोग, गाँवों को लग गया सुविधा का रोग। जीने के अकेले होकर अभ्यस्त, रह

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