संस्कृति ही मिट रही है

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25 -Jun-2017 Ramashankar Rai 'Vanphool' Culture Poems 0 Comments  194 Views
संस्कृति ही मिट रही है

संस्कृति ही मिट रही है सभ्यता के गांव में, अपराध देखो पल रहा है, न्याय के ही छाँव में, इस पौध की पत्ती ही नहीं, जड़ तलक भी सड रही है, और गंगा की ये नहरें, कर्मनाशा की तरफ़ ही बढ़ रहीं हैं, न्याय की आवाज कानों तक पहुँच पाती न

हिन्दी भाषा

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15 -Sep-2016 Suresh Chandra Sarwahara Culture Poems 0 Comments  281 Views
हिन्दी भाषा

हिन्दी भाषा भारत माता की वाणी यह कोटि कोटि कण्ठों का हार, आओ, हम हिन्दी भाषा का करें हृदय से मिल सत्कार। हिन्दी भारत की धड़कन है जन मन- वीणा की झंकार, भावों के उलझे तारों को सुलझाती यह भली प्रकार। यही सूत्र है जिसमे

Har Yuva Bore Ho Raha H....

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16 -Mar-2016 akhilesh kumar Culture Poems 0 Comments  482 Views
Har Yuva Bore Ho Raha H....

Dekho Charo Or Kya Gajab Ho Raha H... Shahar Me Hai Sannata Aur Social Media Par Bato Ka Shore Ho Raha H... Ye Na Jane Kon Si Bimari Lagi Hai Hme Koi Is Group Me To Koi Us Group Me Add Ho Raha H.... Chal Raha H Ye Daur Fb, Twitter Or Whatsap Ka Na To Koi Aaram Se Kha Raha H Aur Na Hi Koi Chain Se So Raha Hai.... Ho Jati H Bhore Chatting Karte Kare Fir Bhi Har Yuva Bore Ho Raha Hai....

दिल एक घर

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11 -Mar-2016 Anwar Culture Poems 0 Comments  411 Views
दिल एक घर

हर दिल मेँ एक घर हो और हर घर मेँ एक दिल, और इन मेँ लोगोँ के रहने का सामान होना चाहिये. हमने जो कदम उठाए हैँ तो फिर कैसे लौट जायेँ? आखिर तो हर एक का कोई, ईमान होना चाहिये. वो बाम तक तो आया था, मुझको ढूँडता हुआ , पर मुझे रोकन

Badal Rahe Parivesh

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01 -Feb-2016 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Culture Poems 0 Comments  318 Views
Badal Rahe Parivesh




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