Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

हैवानियत

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01 -Dec-2019 Sagar Byahut Culture Poems 0 Comments  86 Views
हैवानियत

मेरे जिस्म के चिथड़ों पर लहू की नदी बहाई थी मुझे याद है मैं बहुत चीखी चिल्लाई थी बदहवास बेसुध दर्द से तार-तार थी मैं क्या लड़की हूँ, बस इसी लिये गुनहगार थी मैं कुछ कहते हैं छोटे कपड़े वजह हैं मैं तो घर से कुर्ता और सलवा

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

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31 -Aug-2019 Harpreet Kaur Culture Poems 0 Comments  122 Views
ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ ਦੇ ਿਵੱਚ ਬੋਲਨ ਤਿੱਤਰ ਬਟੇਰ ਆ ਨੀ ਸਹੇਲੀਏ ਗਲ ਲੱਗ ਿਮਲੀਏ ਹੋਏ ਅਸਾਂ ਦੇ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਮੇਲ ਸੁਣਾ ਦੇ ਬਾਤ ਕਿੰਨੇ ਪੂਨੀਆ ਗਲੋਟੇ ਕਰਤੇ ਤੇ ਕਿੰਨੇ ਰਹਿ ਗਏ ਹੋਰ ਸੇਰ ਕਿੰਨੇ ਖੇਸ ਦੇ ਬੰਬਲ ਕੁੱਟੇ ਕੀ ਬੁਣਤੇ ਸਵੇਟਰ ਮਾਹੀ ਲਈ ਬੁਣਤੀਆਂ ਉਧੇੜ ਪਾ

कृषि है प्रकृति की जान

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29 -Jun-2019 Naren Kaushik Culture Poems 0 Comments  337 Views
कृषि है प्रकृति की जान

आओ एक बीड़ा उठाएं मरते किसान को समृद्ध बनाएं जिस कृषि ने पेट भरा सभी का उस कृषि ने फिर रोजगार बनाए आओ एक बीड़ा उठाए हर घर मे सोना चांदी भरकर देश को फिर सोने की चिड़िया बनाए अतिथि देवो भव: के फिर गूंजे नारे आओ भाईचारे क

कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे..........

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06 -May-2019 Piyush Raj Culture Poems 1 Comments  356 Views
कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे..........

"बदल गईल बा अब ई जमाना रे...." भोरे-भोरे सुग्गा के आवाज़ नइखे आवअता अंगना में चिड़िया अब नइखे चहचहावता अब नइखे पहले जइसन दिन उ सुहाना रे कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे दुआरे पे खाट नइखे बाबूजी डॉट नइखे खुल गईल मॉल जबसे पह

हाँ, मैं बिहार हूँ...

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22 -Mar-2019 Deepak Culture Poems 0 Comments  473 Views
हाँ, मैं बिहार हूँ...

हाँ, मैं बिहार हूँ, गर्वित हूँ, सुसज्जित हूँ, सृजित हूँ, धर्मपरायण हूँ, वीर हूँ, सुदृढ़ हूँ, ईश्वर नें मेरी बेहतरीन रचना कि है, हाँ, मैं बिहार हूँ... लहरों सा गतिमान, हिमालय सा खड़ा, अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिलक्षित, स

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