Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

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31 -Aug-2019 Harpreet Kaur Culture Poems 0 Comments  67 Views
ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ ਦੇ ਿਵੱਚ ਬੋਲਨ ਤਿੱਤਰ ਬਟੇਰ ਆ ਨੀ ਸਹੇਲੀਏ ਗਲ ਲੱਗ ਿਮਲੀਏ ਹੋਏ ਅਸਾਂ ਦੇ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਮੇਲ ਸੁਣਾ ਦੇ ਬਾਤ ਕਿੰਨੇ ਪੂਨੀਆ ਗਲੋਟੇ ਕਰਤੇ ਤੇ ਕਿੰਨੇ ਰਹਿ ਗਏ ਹੋਰ ਸੇਰ ਕਿੰਨੇ ਖੇਸ ਦੇ ਬੰਬਲ ਕੁੱਟੇ ਕੀ ਬੁਣਤੇ ਸਵੇਟਰ ਮਾਹੀ ਲਈ ਬੁਣਤੀਆਂ ਉਧੇੜ ਪਾ

कृषि है प्रकृति की जान

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29 -Jun-2019 Naren Kaushik Culture Poems 0 Comments  257 Views
कृषि है प्रकृति की जान

आओ एक बीड़ा उठाएं मरते किसान को समृद्ध बनाएं जिस कृषि ने पेट भरा सभी का उस कृषि ने फिर रोजगार बनाए आओ एक बीड़ा उठाए हर घर मे सोना चांदी भरकर देश को फिर सोने की चिड़िया बनाए अतिथि देवो भव: के फिर गूंजे नारे आओ भाईचारे क

कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे..........

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06 -May-2019 Piyush Raj Culture Poems 1 Comments  315 Views
कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे..........

"बदल गईल बा अब ई जमाना रे...." भोरे-भोरे सुग्गा के आवाज़ नइखे आवअता अंगना में चिड़िया अब नइखे चहचहावता अब नइखे पहले जइसन दिन उ सुहाना रे कइसन बदल गईल बा अब ई जमाना रे दुआरे पे खाट नइखे बाबूजी डॉट नइखे खुल गईल मॉल जबसे पह

हाँ, मैं बिहार हूँ...

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22 -Mar-2019 Deepak Culture Poems 0 Comments  350 Views
हाँ, मैं बिहार हूँ...

हाँ, मैं बिहार हूँ, गर्वित हूँ, सुसज्जित हूँ, सृजित हूँ, धर्मपरायण हूँ, वीर हूँ, सुदृढ़ हूँ, ईश्वर नें मेरी बेहतरीन रचना कि है, हाँ, मैं बिहार हूँ... लहरों सा गतिमान, हिमालय सा खड़ा, अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिलक्षित, स

राष्ट्रीय दिवस

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27 -Nov-2018 Abbas Bohari Culture Poems 0 Comments  275 Views
राष्ट्रीय दिवस

एक चौथाई सदी गुज़र रही रहते इस देश रंगा घर परिवार अपनाकर यहिका भेस देखे बदलते चरण संयुक्त अरब अमीरात बना था लेकर साथ सात मज़बूत इमारात अपार आत्मविश्वास से हुआ सृजन निराला अनेक धर्मो संस्कृतियों की अनोखी माला सर्

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