Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

भारतीय सभ्यता

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11 -Sep-2020 Madhu Culture Poems 0 Comments  23 Views
भारतीय सभ्यता

भारतीय सभ्यता हाथ हिला हिला कर ये है है क्यों करते हो ? हाथ जोड़कर सीधे नमस्कार क्यों न करते हो। नमन से उदगार हुआ नमस्कार, भारतीय सभ्यता का प्रतीक है नमस्कार। सीमा रेखा को बढ़ाने के लिए लगे हुआ हो, ज़मीन के टुकड़े के लि

गाली गौरव

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12 -Aug-2020 nil Culture Poems 0 Comments  116 Views
गाली गौरव

गाली गौरव हर भाषा हर देश में ,गाली का अस्तित्व समय समय की गालियाँ, रखतीं बड़ा महत्त्व रखतीं बड़ा महत्त्व ,भरें खुशियों से झोली होता द्वाराचार ,उछलतीं गाली भोली देती हैं आनंद ,सभी को अच्छा खासा समय विषय अनुकूल, गूजती

पालघर अब बर्दाश्त नहीं!

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19 -Apr-2020 Sandeep Kumar Culture Poems 0 Comments  503 Views
पालघर अब बर्दाश्त नहीं!

बहुत हुआ अब शास्त्र पढ़ाना बहुत हुआ अब धर्म ज्ञान जो बचना है तुझको ऐ हिन्दू कर तैयारी ये है महासंग्राम तुझे बचाने को कृष्ण नहीं अब आएंगे देवी माँ काली का रूप नहीं दिखलायेंगी परशुराम सा तेज भाल पर है तेरे उठा शस्त्

हैवानियत

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01 -Dec-2019 Sagar Byahut Culture Poems 0 Comments  418 Views
हैवानियत

मेरे जिस्म के चिथड़ों पर लहू की नदी बहाई थी मुझे याद है मैं बहुत चीखी चिल्लाई थी बदहवास बेसुध दर्द से तार-तार थी मैं क्या लड़की हूँ, बस इसी लिये गुनहगार थी मैं कुछ कहते हैं छोटे कपड़े वजह हैं मैं तो घर से कुर्ता और सलवा

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

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31 -Aug-2019 Harpreet Kaur Culture Poems 0 Comments  307 Views
ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ

ਮਹਿਕਦੀਆਂ ਹਵਾਵਾਂ ਦੇ ਿਵੱਚ ਬੋਲਨ ਤਿੱਤਰ ਬਟੇਰ ਆ ਨੀ ਸਹੇਲੀਏ ਗਲ ਲੱਗ ਿਮਲੀਏ ਹੋਏ ਅਸਾਂ ਦੇ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਮੇਲ ਸੁਣਾ ਦੇ ਬਾਤ ਕਿੰਨੇ ਪੂਨੀਆ ਗਲੋਟੇ ਕਰਤੇ ਤੇ ਕਿੰਨੇ ਰਹਿ ਗਏ ਹੋਰ ਸੇਰ ਕਿੰਨੇ ਖੇਸ ਦੇ ਬੰਬਲ ਕੁੱਟੇ ਕੀ ਬੁਣਤੇ ਸਵੇਟਰ ਮਾਹੀ ਲਈ ਬੁਣਤੀਆਂ ਉਧੇੜ ਪਾ

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