Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दहेज / Dahej

0
02 -Oct-2019 Anil Mishra Prahari Social Issues Poems 1 Comments  178 Views
Anil Mishra Prahari

दहेज लूटता रहा।
दहेज बेलगाम है
प्रथा स्वच्छंद आम है,
समाज को डुबो रहा
कलुष असीम बो रहा।
कुटुम्ब छूटता रहा
दहेज लूटता रहा।

माँग बेशुमार है
मुद्रिका व हार है,
गरीब बाप झुक गया कदम बढ़ाके रुक गया।
स्वप्न टूटता रहा
दहेज लूटता रहा।

माँ बहुत उदास है
जीवन्त एक लाश है,
वेदना रची ह्रदय
श्वास की ये रुद्ध लय।
भ्रातृ हूकता रहा
दहेज लूटता रहा।

लाडली कई जली
त्यागकर धरा चली,
गली- डगर उदास है
अनबुझी ये प्यास है।
ममत्व सूखता रहा
दहेज लूटता रहा।

अनिल मिश्र प्रहरी।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

  • Divya Raj kumar
    Divya Raj kumar (Registered Member)
    Commented on 09-October-2019

    Aaj ki vastvikta ko aapne apne shabdon se byan kr diya....bhot acha likha h apne....

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017