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डर।

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14 -Oct-2019 Anil Mishra Prahari Motivational Poems 0 Comments  503 Views
Anil Mishra Prahari

डर-डरके भी जीना क्या है जीना यारों!

जो होना, उसको होना है
कुछ पाना, कुछ तो खोना है,
अनहोनी होगी मत डरना
आँखों में मत आँसू भरना,
माना जीवन नहीं सरल है
भरा हुआ भी बहुत गरल है।
जीवन का विष भी खुश होकर पीना यारों,
डर-डरके भी जीना क्या है जीना यारों!

सीख गगन में खुलकर उड़ना
मंजिल से पहले न मुड़ना,
आँधी को औकात बता दो
खोल पंख अब उड़े जता दो,
नभ अपनी मुट्ठी में कर ले
निडर उड़ो ऐसा दो पर ले।
बनने दो फौलादी अपना सीना यारों
डर-डरके भी जीना क्या है जीना यारों!

डर के आगे जीत सुना है
अग्निपथ इसलिए चुना है,
जलता है पग जल जाने दे
तलवों में फोड़े आने दे,
अँधियारा तो है दो पल का
आँखों में क्यों आँसू छलका?
डर तेरे जीवन से सुख है छीना यारों
डर - डरके भी जीना क्या है जीना यारों!

अनिल मिश्र प्रहरी।



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