Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दास्तान / Dastan

0
24 -Apr-2018 pankaj taparia Love Poem 0 Comments  1,035 Views
pankaj taparia

गुजर गयी है‌ जो, वो दास्तान लिख रहा हूँ ।
खामोश हो गई है जो, वो जुबान लिख रहा हूँ ।

छूकर गुजर गयी है‌ तू मुझको बेपरवाह हवाओं की तरह,
तेरा मुझमें बाकी एक एक निशान लिख रहा हूँ ।

सितम कर गया तू मुझ पर ही मेरा होकर भी ऐसे, कि जो
तेरा वजूद है मुझमें अब उसे मैं पाकिस्तान लिख रहा हूँ

कभी तो हुआ करती थी मेरी पहचान सारी तुझसे ही,
पर तुझे मैं अब महज एक अनजान लिख रहा हूँ ।

मेरी हर एक खुशी की वजह तू ही थी हमेशा ही,
पर अब "पंकज" तुझे मैं मेरा बस अहज़ान लिख रहा हूँ ।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017