Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Papa ki Pari

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31 -May-2020 RAMESH BISHT Daughter Poems 0 Comments  446 Views
Papa ki Pari

Paapuu, aap bolten ho mei aapki Pari hoon, Betu hoon, Mahira hoon aapki Paapuu, main abhi Sahi se bol Nahi paati toh kya hua Kya mujhe aapki Yaad Nahi aati, Saara din Ghar ke har kono mei aapko hi Dhundtii hunn Pata mujhe bhi hai, MERI Tasviron ko Dekh Yaad karten ho MERI Hansi Dekh Kar Kabhi hansten ho Kabhi Roo dete hoo Aur sapno mei bhi mujhse hi Baaten karten hoo Haan mummy ,Dada dadi khayaal toh rakhten hai meraaa Parr aap mujhe jyadaaa smjhten hoo.... Abb bas Jaldi se gharr aa jaoo Paapuu Jitnaaa pyaar Karti hoon, utnaaa gussaa bhii karti

---:"बेटी":---

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10 -May-2020 BABUL KUMAR SINGH Daughter Poems 0 Comments  199 Views
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माँ मैं भी तेरी बेटी हूँ..... सारी दुनिया से थक कर, तेरी गोद में लेटी हूँ! जिस दिन मैं दुनिया में आयी, सबको खुश मैं रख ना पायी! कुछ ने मुँह को मोड़ लिया, तुझसे भी रिश्ता तोड़ लिया मेरे कारण तुम दुःख पायी, मैं कैसी अभागी बेटी

इक ख्वाब

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07 -Apr-2020 Suprit Dere Daughter Poems 0 Comments  102 Views
इक ख्वाब

इक ख्वाब थी मेरी अब हकीकत बनचुकी हो तुम //2// मुझ जैसे भटके का सहारा बनचुकी हो तुम इस अंधे की आंखोकी रोशनी बनचुकी हो तुम रोते हुए दिल की हसी बनचुकी हो तुम दिल मे रखे सपनो की उमीद बनचुकी हो तुम इक ख्वाब थी मेरी अब हकीकत

एक गुहार

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09 -Feb-2020 Bhagyashree Patidar Daughter Poems 0 Comments  209 Views
एक गुहार

काहे मेरे सपनों पर तु थोपे अपनी मर्जी बापू चाँद की इच्छा राखु में काहे फूलो से मुझे तू समझाए बापू उड़ने दे मुझे आसमान तक बेड़िया न बाँध मेरे पैरों में चाहती हु करना मुक्कमल अपने सपनो को एक मौका डाल के देख मेरी झोली म

निर्भया

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31 -Jan-2020 ROB!N Daughter Poems 0 Comments  267 Views
निर्भया

मैंने वक़्त को बेवक़्त रोते देखा है, यहाँ मैंने खुद को बिकते हुए देखा है। मैंने देखा है बिकता हुआ कानून, पैसों के नशे में कानून को झूमते हुए देखा है। मैंने यहाँ सत्य को मारते हुए देखा है। मैंने देखा है,बेटियों के हस्

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