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Beti Ki Awaaz

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17 -Jan-2013 AMAR PRAKASH Daughter Poems 1 Comments  4,249 Views
AMAR PRAKASH

एक नन्हीं सी परी ने पूछा, माँ की कोख से,
माँ, ये दुनिया वाले ऐसे क्यों है?
जिसने अभी इस दुनिया में, कुछ भी ना किया,
उसके ही खून की प्यासे क्यों है?

नन्हीं सी कली के खिलने से पहले,
दुनिया के लोगों को मिलने से पहले।
लगता है, नाखुश हैं, ये सब परिवार वाले?
क्यों लटके हैं, मुहँ इनके? ये कैसे रिश्ते वाले?

क्या मेरी दादी, और, क्या मेरी बुआ?
लग रहीं हैं जैसे, कोई हार गईं जुआ।
अरे! भूल जाओ अब, जो हुआ सो हुआ,
मैं ही चलाऊँगी वंश, तुम दो तो दुआ।

क्यों तुम दुखी हो? और किस बात का है गम?
आज की बेटी नहीं है, किसी बेटे से कम।
कंधे से कन्धा मिलाके चलूंगी, जमाने में,
पीछे ना हटूंगी कभी, मेहनत से कमाने में,

माँ, ओ माँ, तू तो सुन रही है ना, माँ,
जमाने के बहकावे में ना आ जाना माँ।
ये लोग नहीं जानते ये क्या कह रहे हैं,
अपने आप ही खुद भगवान बन रहे हैं।

सृष्टि के नियम से, खिलवाड़ कर रहे हैं,
प्रकृति के संतुलन को, बर्बाद कर रहे हैं।
ये कौन सा वंश चलाना चाहते हैं? और कैसे ?
बिना माँ के बेटे लायेंगे कहाँ से, और कैसे, माँ कैसे ?

कहते हैं इंसान, खुद को, इन्हें शर्म क्यों नहीं आती?
बेटी के जन्म से पहले, क्यों फटी है इन की छाती?
शर्म करो, दुनिया वालो, जो यह अपराध करोगे अब?
समूल नष्ट हो जाओगे, और पछताओगे तब।



Dedicated to
To all daughters

Dedication Summary
This poem is dedicated to all the daughters who can come on the earth. I appeal to all those who differentiate between daughter and son, that please do not try to become GOD. Try to become good parents. Forget the future and take care of the present. The dynasty (vansh) will automatically be taken care of by your good karmas towards others.

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1 More responses

  • poemocean logo
    Gianchand (Guest)
    Commented on 18-January-2013

    aMAR JI NICE POEM WITH HIGH MESSAGE.

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