Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

Bitiya

1
25 -Jan-2013 anil shrivastava ' zahid ' Daughter Poems 1 Comments  2,808 Views
anil shrivastava ' zahid '

तितली जैसे होते पंख
दूर गगन उड़ जाती मैं ।
इंद्रधनुष और तारों से भी ,
जाके फिर मिल आती मैं ।
हरे-भरे पेडों के पत्ते ,
लाल गुलाबी फूलों को ,
अपना प्यार जताती सबको ,
उनका भी ले आती मैं ।
सहरा की पर्वत की या फिर .
पथरीली सब राहों की ,
बाधाओं को आसानी से
पार सदा कर जाती मैं ।
पैदा होकर लता-कल्पना ,
इंद्रा भी बन जाती मैं ।
भाई दूज पर भैय्या के
माथे पर तिलक लगाती मैं ।
किस्मत मेरी ऐसी न थी ,
कोख में मुझ पर वार किया ।
पंखों के खुलने से पहिले ,
तितली को ही मार दिया ।
आँसू मेरे बहते हैं ।
और वे सारे ये कहते हैं ।
जीवन देने वाले क्यों ,
दुष्कृत सदा ये करते हैं ।
जग में अकर नटखट सी ,
सब बाल शरारत करती मैं ।
चूडी बिंदी टिकिया और ,
चुनरी से खूब संवरती मैं ।
कहती मम्मी देख मुझे ,
बलिहारी तुझ पर जाऊँ मैं ।
और पापा की प्यारी रानी ,
बिटिया भी कहलाती मैं । ।



 Please Login to rate it.



You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

1 More responses

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017