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देखना फिर एक नया सवेरा होगा… !!

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26 -Apr-2020 Saroj Life Poem 0 Comments  650 Views
Saroj

अभी ये कुछ महीने पैहले ही की तो बात है,
जब थी सड़क पे चहल पैहल,
था लोगो का आना जाना यहां से वहां,
थे लोग मसगुल अपनी जिंदगी में,
भाग रहे थे इधर से उधर मजिल की खोज में,
लगी थी होड़ आगे निकलने की सबको,
कोई दफ्तर की और भाग रहा था,
कोई किसी के साथ नए प्रोजेक्ट पे काम कर रहा था,
डॉक्टर नर्सेस भी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे,
बॉर्डर पे सैनिक भी डटे खड़े थे,
फ़िक्र थी आने वाले कल की सबको,
कोई आने वाले त्योहारों की तयारी में जुटा था,
किसी की होने वाली शादी थी,
कोई रिस्तेदार की शादी में जाना चाह रहा था,
कोई दो वक्त की रोटी खातिर सड़को पे बैठा था,
ख़ुशी का समां था, हसीं ये फिजा था,
चिड़ियों की चू चू की आवाज थी, मोसम बड़ा सुहाना था,
मॉल में भी कुछ डिस्काउंट का ऑफर चल रहा था,
सिनेमा हॉल में हमारे चहेते हीरो का नया फिल्म लगा था,
गार्डन में बच्चे दादा दादी के साथ मस्ती कर रहे थे,
व्यू पॉइंट पे सबका आना जाना था,
बगल की आंटियो का किटी पार्टी भी मस्त चल रही थी ,
फ्राइडे नाईट में नोजवानो का मैहफिल जमा था,
हमारा भी दोस्तों के यहां आना जाना था,
फिर कुछ यु मजार बदलेगा, बादल ये रोयेंगे,
कुछ होगा ऐसा अनहोनी कहा हमे ये आभास था ..!!

ये दिसम्बर का महीना था,और देश का नाम चीन था,
सुना हमने वह से कोई लैहर चली है,
जो अपने साथ एक भयंकर बीमारी लेकर निकली है,
और देखते ही देखते ये दुनिया में फैलने लगी,
हमारे देश को भी इस बुरी बला की नजर लग गई,
लोगो से कैहते सुना, नहीं इस बीमारी का इलाज अभी कोई,
अगर जो हम बैठे अपने घरो में, ये बीमारी बढ़ेगी नहीं,
और फिर हम एक जुट हो गये पुरे हिंदुस्तानी,
कहा जो हमारे प्राधनमंत्री ने सबने उनकी बात मानी,
इस बीमारी को नहीं है बढ़ने देना हमने ये बात ठानी,
पर हम थोड़े असफल हो गये और ये बला कुछ लोगो को लग गई,
फिर सैकड़ो डॉक्टर,और नर्स संभालने लगे अपने देश का कमान,
24 घंटे लग गवाए देश की सेवा में पैहन के खाकी वर्दी,
हमारी पुलिस ने भी अपना फर्ज बखूभी है निभाया,
हम रहे सुरक्षित इस खतिर उन्होंने अपने परिवार को भी है भुलाया,
लड़ रहे है वो हर पल धुप में, बारिश में, रात में,
कर रहे है सैनिटाइज शहर शहर ,हर गली को,
अपने जान की क़ुरबानी लगा कर,
सब जानते है ये वक्त है साथ मिल कर चलने का,
इसलिए गली गली घूम रहे है खाने का पैक्ट लेकर,
क्युकी कोई कही भूखा न रैह जाये,
कोई इस मातृभूमि को पराया न कह जाये,
हम जानते है अपने इस जमी को,
ये अपना प्यारा वतन है, बस कुछ वक्त का इम्तिहान है,
हम सफल होंगे और जल्द ही निकल जायेंगे इस बुरे वक्त से,
फिर होगी ख़ुशी की बरसात इस आसमा से ..!!

सुना है प्रयोग चल रहा है देश की कई कोने में,
लगे है दिन रात हमारे साइंटिस्ट इस इलाज की दवा ढूंढने में,
बस हमे हौसला बनाये रखना है ये कुछ पल की ही है बात,
माना की है बहुत सारे लोग अपनों से दूर किसी शहर और किसी गांव में,
पर दूर रैहके भी अपनों से रिस्ता बनाये रखना है,
जरुरत है अगर किसी को तो हमेसा हाथ बढ़ाये रखना है,
देखना बहुत जल्द ही ये बुरी हवांए अपना रुख बदल लेंगी,
और फिर से हम अपनी पुरानी जिंदगी में लोट आएंगे,
फिर से वही हसीं के गीत गुनगुनायेंगे,
देखना जल्द ही हमारा हिंदुस्तान शान से इतरायेगा,
सोकर जब उठोगे उस दिन,
देखना ये सुरजा की पैहली किरण बहुत मुस्कुराएगा,
और खिलते हुए कली भी फूलो से इठलायेगा,
वो खुश होगा आज मुझे कोई अपने गजरे में लगायेगा,
उड़ती हुई तितली भी थोड़ी सरमायेगी,
आसमा ये जमी की जित पे गरज गरज कर गीत गुनगुनायेगा,
अगर जो हुआ न बसंत का मौसम भी तो क्या,
देखना उस दिन भी ये सरसो की पिली फूल लैहरायेगा,
ये गुजरा हुआ कल सबको हमारे जित की कहानी सबको सुनायेगा ..!!



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