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धरती आंसू टपकाती है |

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12 -Apr-2020 DINESH CHANDRA SHARMA Natural Disasters Poems 0 Comments  292 Views
DINESH CHANDRA SHARMA

धरती आँसू टपकाती है |
आज ये कैसा कठिन समय है, सब पर ही आफत आती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||

कैसी ये मनहूस घड़ी है | मौत सामने आन खड़ी है |
सब पर ख़तरा मंडराता है | कोई न इससे बच पाता है |
बिलख बिलख कर बच्चे पूछें, ये कैसी विपदा आती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||

भूखे प्यासे लोग खड़े हैं | रोगी और लाचार पड़े हैं |
कोई उपचार न हो पाता है | दर्द सभी को तड़पाता है |
समाधान करना है जिनको, मौत उन्हें भी धमकाती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||

बिलख बिलख मानवता रोती | बिखर रहे माला के मोती |
आसमान भी अब रोता है | चहुँ दिसि चीत्कार होता है |
व्याकुल हुई है सृष्टि सारी, प्रलय की आहट आती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||

टूटी लडियां टूटे सपने | तड़प तड़प कर मरते अपने |
मरते समय पास न कोई | शव के बिना ही विधवा रोई |
दर्दनाक है मौत भी इतनी , स्वयं मौत भी थर्राती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||

खूब जुटाए सुख के साधन | क्षीण किये सारे संसाधन |
अब भी समय जाग भी जाओ | कम से अपना काम चलाओ |
पृथ्वी माँ समृद्ध रहे गर, ये वात्सल्य लुटाती है |
क्या होगा इन संतानों का, धरती आँसू टपकाती है ||
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