Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

दिल के कमरे से,,,२

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20 -Sep-2016 p.m. Love Poem 0 Comments  792 Views
p.m.

हां सुनाओ ना कुछ...
तुम्हे क्या लगा मैं रूठा हूँ?
वो भी तुमसे,तुम्हें पता है?......
तुमसे हजारों बातें की थी कल
तुम्हारी खामोशी भी ना..
इशारों इशारों में मुझे
मुँह चिढ़ाती सी बोली
कि अच्छा नहीं लगता यूँ
रूठा रूठा सा मैं....
और मेरी नाराजगी
जो कहना चाह रही थी तुमसे
कि आओ ना फिर से टांक दो
अपने प्यार की बटन
मेरी शर्ट पर........

पर तुम हिटलर सी
चार बार आई तो..
मेरे दिल के कमरे में,,
पर पैर के साथ प्यार भी
पटक कर चली गई.......
फिर मैं भी तुम्हारे प्यार को
सिरहाने रख कर,
टूटा टूटा सा...
अपने बिखरे हुए रिश्ते पर
खीजता हुआ...
अपने बेरंग,फटे हुए
जीवन के से......
जूतों में पैर डालकर
हमारे उस दिल के कमरे से
बाहर निकल गया........



@p.m.@✍



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