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दिल में बसाले वो मेहमान "रहस्य "

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27 -Jun-2017 रहस्य Bewafai Poems 0 Comments  573 Views
दिल में बसाले वो मेहमान

दिल में बसाले वो मेहमान "रहस्य "

जैसा चाहा वैसा उन्हें यार न मिला ,
दिल में बसाले वो मेहमान न मिला ,,
%%--------%--------%%

चाहने वाले तो हर मोड़ पर मिले उसे,
हमारे जैसा उसे पर ऐतबार न मिला,,
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ढूंढने की कोशिश बहुत किये वो मगर,
मेरे जितना किसी से विश्वास न मिला,,
%%--------%--------%%

और आजमाइसे कर ले दुनिया बड़ी हैं,
फिर कहना आपसा मोहब्बत न मिला,,
%%--------%--------%%

ये बदनसीबी है तेरी सब कुछ मिला पर,
मगर "रहस्य"जितना उसे प्यार न मिला,,
%%--------%--------%%

जैसा चाहा वैसा उन्हें यार न मिला ,,
%%--------%--------%%
((((" रहस्य ")))))देवरिया)))))))

दिल में बसाले वो मेहमान


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