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दिवाली....

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06 -Nov-2018 Saroj Diwali Poem 0 Comments  166 Views
Saroj

इस दिवाली पे भी माँ मैं घर न आ पाऊंगी,
और तेरे संग ना दिवाली की दिप जला पाऊंगी,
जानती हूं तुम भी बहुत याद कर रही होगी मुझे,
जब तुम घर की सफाई अकेले कर रही होगी,
जब तुम घर की सजावट अकेले कर रही होगी,
जब सब लोग होंगे तेरे आस पास,
बस एक मैं ही नजर आउंगी,
उस पल तुम छुप के आंसू बहा रही होगी,
जानती हूं माँ मैं तुम्हे अकेले दिवाली की मिठाई अच्छा नही लग रहा होगा,
साम को जब तुम पूजा करोगी उस पल भी मुझे याद कर रही होगी,
और आरती के लिये मुझे ढूंढ रही होगी,
यु तो तुम अपने काम में व्यस्त होगी,
पर तुम मेरे बारे में ही हरपल सोच रही होगी,
शायद आ जाये मेरी आहट कही से आने की,
बार बार तुम दरवाजे की तरफ देख रही होगी,
जानती हूं माँ मैं तुम्हे कुछ भी अच्छा नही लग रहा होगा,
रात को जब तुम छत पे अकेले दीये जला रही होगी,
सोचोगी कास मैं होती तो साथ
हम मिल के दिये जलाते,
क्योंकि तुम जानती हो मुझे दिये जलाना कितना पसंद है,
क्योंकि तुम जानती हो मुझे पूजा की थाली सजाना पसंद है,
क्योंकि तुम जानती हो मुझे तेरे संग और तुम्हे मेरे साथ रैहन कितना पसंद है,
पर माँ तुम फ़िक्र मत करना,
और मेरे हिस्से का भी तुम दिवाली मनाना,
और इस दिवाली की रौशनी के साथ तुम भी मुस्कुराते रेहना...
दिवाली की शुभकामनाये बहुत बहुत माँ आपको,
तेरा मुझ से है बस इतना ही कैहना...



Dedicated to
My mother

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