Jab jab ham ye deep jalaye

0
20 -Oct-2017 Pragya Sankhala Diwali Poem 0 Comments  19 Views
Jab jab ham ye deep jalaye

जब जब हम ये दीप जलाये १ खुशियों के मोती जगमगाये ११ नैनो में ना हो दुःख का अँधेरा १ चमचमके खुशियों का सवेरा ११ जब जब हम ये दीप जलाये १ खुशियों के मोती जगमगाये ११ रातों में ना हों भीगी अँखिया १ मुस्कान के मोती बिखराय

हर दीप कुछ कहता है....

0
हर दीप कुछ कहता है....

"अनंत काल से सबके मन में आ रहा पलता हूँ ..मैं.। दीप हूँ आस्था का बिना तेल घी रहता जलता हूँ मैं.।,, हर दीप कुछ कहता है.... हर दीवाली हैं हम दीप जलाते दीप जला कर हैं अंधकार भगाते नाचते गाते खुशियाँ मनाते पर अक्सर हम ये हैं भ

दीपों के त्यौहार का कुछ तो महत्व मानिए

0
18 -Oct-2017 Shivendra Singh Diwali Poem 0 Comments  59 Views
दीपों के त्यौहार का कुछ तो महत्व मानिए

दीपों के त्यौहार का कुछ तो महत्व मानिए, अपने ऐतिहासिक पर्व का सही अर्थ जानिए | दीपावली हमारी दीप चीन के होते हैं , मिट्टी के दीपक बनाने वाले अब रोते हैं | डिजिटलाईजेसन (Digitalisation) के दौर में, इतना भी सब डिजीटल (Digital ) ना हो जा

Khushiyan banaye rakhna

0
18 -Oct-2017 Narendra Diwali Poem 0 Comments  66 Views
Khushiyan banaye rakhna

*अँधेरा कितना भी घना हो एक दिया राह दिखा देता है,* *बढ़ते रहें लगातार कदम तो हमें मंजिल पर पहुंचा देता है,* *दिवाली तो पर्व है खुशियों के आगमन का इसलिए* *आपकी जिंदगी खुशनुमा हो जाए ये दिल दुआ देता है।* *दीप जलें उम्मीदो

दिवाली आज आयी है, जलाओ प्रेम के दीपक

0
17 -Oct-2017 Madan Saxena Diwali Poem 0 Comments  71 Views
दिवाली आज आयी है, जलाओ प्रेम के दीपक




Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017