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दिया जलाया था हमने

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21 -Nov-2021 Madhu Miscellaneous Poems 0 Comments  82 Views
Madhu

दिया जलाया था हमने

चार दिन की ज़िंदगी है,
चिंताओं ने घेरा है।

गम का अँधेरा है,
सन्न सन्न हवा चल रही है।

जलाया था हमने दिया,
हवा के झोंके से बुझ गया।

अंधियारी रात में काँप उठे हैं,
आशा का दीप जला रक्खा है।

सुबह आशा का है डेरा,
कौन जाने कब होगा सवेरा।

चार दिनों की ज़िंदगी है,
चार दिनों की चांदनी।

चार चाँद लग जाते हैं,
जब मिल बैठें चार साथ।

दिल का राज़ न खोलो अपना,
दोस्ती कितनी भी हो गहरी।

गम को छुपाकर रखना,
एक कला है मुस्कराना,
उसे भूल न जाना।

वक्त न गवाना बन्दे,
दो और चार के चक्कर में,
नहीं करता प्रतीक्षा किसी की,
वक्त बड़ा बलवान है।

Madhu Shahani
Fremont (CA)



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