Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

दो शब्द लिखूं

0
06 -Oct-2018 Naren Kaushik Countryside Poems 0 Comments  90 Views
दो शब्द लिखूं

दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै,
सोने की चिड़िया कहलावै था ज्ञान की बारिश होया करै थी इस भारत देश मेरे मैं।२

स्वत: उपजते:भूमि जिसकी फलों की सारी किस्में जिसकी,
दुध दही के खाणे जिसके हर बात है निराली जिसकी,
शुद्ध आहार विरूद्ध आहार का ज्ञान दुनिया तै दिया भारत देश मेरे नै।२
दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै,


महाभारत के मैं ज्ञान दिया गीता का भारत देश मेरे नै,
रामायण के में भाईचारे का पाठ पढ़ाया भारत देश मेरे नै,
दोनोें ग्रन्थ यो ज्ञान देवै भाई भाई जै मिलके चालै ओर करै सम्मान नारी जात का कोई काट पावै ना उसकी वंश बेल नै।२
दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै,

सदा ज्ञान में रहा अग्रणी भारत देश मेरा रै
सबतै ज्यादा बोली बोलैं सब धर्मों के लोग सबै
सुश्रुत संहिता में मेडिकल साइंस का देकै ज्ञान कर दिया चमत्कार भारत देश मेरे नै।
दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै,

आंख मिचे काम चले ना सुण लो सारे देशवासी रै,
सबतै सम्पन धरा भारत की नू कहवै भारत माता रै,
इसी मां की कोख में बालक मर जा या साची बात कोना
मां के नाम ते प्रसिद्ध दूनिया मैं वो भारत देश मेरा सै।
दो शब्द लिखूं भारत की शान मे अन्न धन के भरे रह थे भंडारै भारत देश मेरे मै,

नरेन कौशिक



Dedicated to
भारत वासियों के

Dedication Summary
जो मूर्ख भारतीय हम भारतीयों को गरीब बेरोजगारी के मारे मानते हैं स्वत: उपजते धरा पे
ग़रीबी भूखमरी हमारी संस्कृति का अपमान है इससे हमारी सोच गिरने का पता चलता है
अतिथि देवो भव: का मतलब एक दूसरे का सम्मान करना था फिर आज हमारी सोच को क्या हो गया हमारे देश से फल के पेड़ कहां गए ?

 Please Login to rate it.


You may also likes


How was the poem? Please give your comment.

Post Comment

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017