Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

निराशा तुझको छोड़ चुकी हूँ मैं।

0
31 -Jul-2020 Dr. Swati Gupta Dream Poems 0 Comments  227 Views
निराशा तुझको छोड़ चुकी हूँ मैं।

निराशा तुझको छोड़ चुकी हूँ मैं, अब फिर से वापस न आना, आशाओं के जो फूल खिले हैं, अब तुम उनको न मुरझाना, विश्वास जगा है मन में फिर से, उम्मीद का दामन थाम चुकी हूँ, नई जोत जगी है मेरे मन में, अंधकार अब छटने लगा है, आशा की एक न

अभी तो पूरा काम बाकी है

0
06 -Dec-2019 Satyam Devu Dream Poems 0 Comments  1,106 Views
अभी तो पूरा काम बाकी है

-:अभी तो पूरा काम बाकी है:- आँखे बंद सी होने लगी है, अभी तो आधी रात बाकी है, सोऊँ कैसे? अभी तो पूरा काम बाकी है। दिल तो कर रहा है नाचने को, मगर नाचूं कैसे? अभी तो पूरा इम्तिहान बाकी है। समय भी परीक्षा ले रहा है, समय भी परीक

दिल का मौसम कब बदलेगा

0
07 -Jul-2019 Mukesh Kamti Dream Poems 0 Comments  861 Views
दिल का मौसम कब बदलेगा

दिल का मौसम कब बदलेगा ? पतझड़ के मौसम में, सावन का फूल जब खिलेगा । भबरो की गुन गुनाहट से, मन का आंगन जब झूमेगा । दिल का मौसम तब बदलेगा ।

बिना मात्रा की कविता / Bina Maatra Ki Kavita

0
20 -Mar-2019 mannu bhai Dream Poems 0 Comments  2,441 Views
बिना मात्रा की कविता / Bina Maatra Ki Kavita

बहुत सुन्दर सर मैने भी प्रयास किया बिना मात्रा की कविता का *बिना मात्रा की कविता* नर ह रह नर बन कर, थन रख हरदम तन कर। मन पर वजन कम कर, पर दरद पर नयन नम कर। हर तरफ ह नफरत जहर,जमघट सम ह यह शहर। रण पर बरस जम कर, न पद रख पथ पर थम

कविता कैसे बने

0
14 -Mar-2019 mannu bhai Dream Poems 0 Comments  401 Views
कविता कैसे बने

. *कविता कैसे बने* पुष्पोंं को संग सटीक पिरोकर, पुष्पमाल बन जाये। तारों को भी सटीक बुनकर, मत्सजाल बन जाये। सुरों को कुछ सटीक प्रयोग कर, सुर साज बन जाये। कंकर पे कंकर सटीक लगा कर, गिरीराज बन जाये। बूंद से बूंद सटीक मि

Poemocean Poetry Contest

Good in poetry writing!!! Enter to win. Entry is absolutely free.
You can view contest entries at Hindi Poetry Contest: March 2017