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दृढ़ संकल्प

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14 -May-2021 Sweta Kumari Motivational Poems 0 Comments  312 Views
दृढ़ संकल्प

माना कि, हाहाकार मचा है,
जिसका मन पर प्रहार बड़ा है,
इससे पहले भी, हमने अपनो को खोया,
खून के आँसू, उस पर दिल रोया,
पर, इसबार आकार बड़ा है, जिसका मन पर प्रभाव पड़ा है।
उसका भी व्यापार बना है,
नेताओं का अखाड़ा सजा है,
मन में अंधकार घना है।
इन बातों से क्या होगा?
भीतर का अंधेरा फिर और बढ़ेगा,
हमारा फ़र्ज़ क्या पूरा होगा?
मन को इतना कमज़ोर करें क्यों?
होनी पर अपना जोर नहीं जब,
फिर जाना उस और ही क्यों कब?
'जब जागे तब हुआ सवेरा'
इस मंत्र को अपनाएं अब,
हटाकर के मन का अंधेरा, उम्मीद का दीप जलायें अब।
जो चले गए, उनका अफसोस बहुत है,
माना कि, आक्रोश बहुत है,
जो शेष हैं, उनको बचाना होगा,
वरना फिर पछताना होगा।
माना कि आंखें सूनी पढ़ी हैं,
होंठो पर सिसकी भी नहीं है,
शरीर पूरा बेजान खड़ा है,
मन का घड़ा भी खाली पड़ा है,
इच्छा-शक्ति के रस से, उस गागर को अब भरना होगा।
अपनी आदतें हमें बदलकर,
नियमों को सारे अपनाकर,
संघर्ष के रथ पर चढ़ना होगा,
सुनहरे कल की आशा के संग,
जीवन पथ पर बढ़ना होगा, जीवन पथ पर बढ़ना होगा।
मन में भय को न आने देंगे,
चिंता को न सताने देंगे,
शरीर कितना भी कमजोर पड़ जाये,
मन से हम नही हारेंगे।
दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर,
हम आगे बढते जाएंगे।
मन को बात ये मनाना है,
माना कि , डगर बहोत कठिन है,
मंज़िल अपनी दूर बहुत है,
रात ऐसी नही हुई है,
जिसकी कोई सुबह नहीं है,
जिसकी कोई सुबह नही है।



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