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Duniyadari Jaam Gai

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06 -Dec-2016 Dr. Roopchandra Shastri Mayank Winter Season Poem 0 Comments  910 Views
Dr. Roopchandra Shastri Mayank

गीत"दुनियादारी जाम हो गई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

नीलगगन पर कुहरा छाया, दोपहरी में शाम हो गई।
शीतलता के कारण सारी, दुनियादारी जाम हो गई।।

गैस जलानेवाली ग़ायब, लकड़ी गायब बाज़ारों से,
कैसे जलें अलाव? यही तो पूछ रहे हैं सरकारों से,
जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।
शीतलता के कारण सारी, दुनियादारी जाम हो गई।।

खुदरा व्यापारी जायेंगे, परदेशी व्यापार करेंगे,
आम आदमी को लूटेंगे, अपनी झोली खूब भरेंगे,
दलदल में फँस गया सफीना, धारा तो गुमनाम हो गई।
जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।

सस्ती हुई ज़िन्दग़ी कितनी, बढ़ी मौत पर मँहगाई है,
बिल्लों ने कुर्सी को पाकर, दूध-मलाई ही खाई है,
शीला की लुट गई जवानी, मुन्नी भी बदनाम हो गई।
जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।

Duniyadari Jaam Gai


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