Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

सतयुग का रावण

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20 -Sep-2019 Suman Kumari Dussehra Poems 0 Comments  362 Views
सतयुग का रावण

रावण बनना भी कहां आसान था, अहंकार था तो पश्चाताप भी था..! वासना थी तो संयम भी था..! सीता के अपहरण की ताकत थी, तो बिना सहमति पर स्त्री को स्पर्श ना करने का संकल्प भी था...! सीता जीवित मिली ये राम की ताकत थी, पर.... सीता पवित्र

रावण कहता है / RAVAN KAHETA HAI

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18 -Oct-2018 shalu L. Dussehra Poems 0 Comments  1,281 Views
रावण कहता है / RAVAN KAHETA HAI

रावण कहता है चौराहे पर खड़ा कर मारते हो मुझे बुराई की नज़रों से देखते हो मुझे कसूर क्या था बस अहंकार मेरा, कहता हूँ राम समझे जो खुद को वो मारे मुझे तीनो लोक चारों पहर बंधे मेरी खूंटी से शक्ति थी मांगू जो मिला वो महादे

Rangmanch Hai Ye Sansaar

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15 -Oct-2018 Shubhi Mehrotra Dussehra Poems 0 Comments  338 Views
Rangmanch Hai Ye Sansaar

Rangmanch hai ye sansaar har vyakti nibha raha hai yahan koi na koi kirdaar naqaab he naqaab hai cheharo pe yahan har koi kar rha hai ek dusre ke kirdaar par vaar rangmanch hai ye sansaar rangmanch hai ye sansaar insaan ne kar diya hai, insaaniyat ko sharmsaar yahan dilo me pyaar nhi, yahan toh sirf hota hai bhavnao ka vyapaar rangmanch hai ye sansaar rangmanch hai ye sansaar tum nhi jaan paoge , kaun nibha raha hai yahan raavan ka kirdaar har patra hai yahan daagi, har dil me hai zeher aapar rangmanch hai ye sansaar rangmanch hai ye sansaar ya

दशहरा / Dussehra

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21 -Oct-2017 Anju Goyal Dussehra Poems 0 Comments  644 Views
दशहरा / Dussehra

साहित्य संगम संस्थान और संगम सुवास नारी मंच का हार्दिक आभार । मेरी रचनाओं को पसंद करने के लिए हृदयतल से हार्दिक आभार । मेरी गुरु आदरणीया छाया दीदी का भी बहुत बहुत धन्यवाद । मैं शब्दों में छाया दीदी का धन्यवाद व्

मैं रावण....

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मैं रावण....

मैं रावण..।।। हाँ मैं रावण मैं लंकेश मैं दशानन चाहे जो कह लो आज फिर तुम मुझे जलाओगे पल भर की खुशियाँ घर आंगन में मनाओगे मगर क्या तुम्हारे ऐसा करने से मैं मर जाता हूँ शायद नहीं क्योंकि ऐसा कोई मानव नहीं जिसमें मैं म

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