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Ehsaason

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29 -Aug-2018 Rashmi Gupta Love Poem 0 Comments  429 Views
Rashmi Gupta

एहसासो को शब्दो मै पिरो के ये जाना,
ख्यालो कि दुनिया को यू पहचाना,
जज़्बातो के समंदर भरे ही पड़े है,
जितना कुरेदो ये उतना बढे है।

हर भावना को पकड़ के ये पूछा,
कौन है तू? कहा से है आई?
नई सी चमक मेरी ऑखो मे जागी,
उसने मुझको जो अपनी कहानी सुनाई ।

हर कहानी पे मुस्का रही हूँ,
सबका स्तोत्र एक ही पा रही हूँ,
प्रेम का है सागर जो अंदर हमारे,
वोही विभिन्न रूपो मै सबको पुकारे।

गोदी के बालक की मुस्कान प्रेम ही है,
संघर्षी के सर का जुनून भी वही है,
आशिक कि ऑखो का सुरूर वही है,
संतो के चेहरे का नूर वही है।
ईर्ष्या, जलन, नफरत भी वोही है।

इश्क, दया, ममता भी वही है,
प्रेम कि धारा अविरल बह रही है ।
भिन्न भिन्न रूपो मै झलका रही है ।।

यही सोच अचरज किये जा रही हूँ ।
हर सवाल का जवाब एक ही पा रही हूँ।।

ये नवीन एहसास मुझे भा रहा है,
समंदर, आकाश से मिलवा रहा है,
हर वाक्या अब नज़म बन गई है,
जैसे कान्हा की मीरा को धुन लग गई है ।
जैसे कान्हा की मीरा को धुन लग गई है ।

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