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एक ख़ामोश सी लहर

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25 -Aug-2020 Tabrez Ahmed Love Poem 0 Comments  67 Views
एक ख़ामोश सी लहर

एक ख़ामोश सी लहर मेरे सीने में है।
वो तो नहीं उसकी हर पहर मेरे दिल के हर कोने में है।
उसकी मुहब्बत थी एक समंदर की लहर की तरह।
उसको चाहा था मैंने चांदनी रात की पहर की तरह।
मगर वो निकली तपती दोपहर की तरह।
उसकी वफ़ा को मैंने मना था मुकद्दर की तरह।
मगर वो बेवफ़ा निकली पतझड़ की तरह।
उसकी हर अदा एक क़हर थी।
पर मुझको क्या खबर के वो ज़हर थी।
उसकी चाहत थी शज़र से।
जिसको नफ़रत थी पतझड़ से।
शज़र- पेड़



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