Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

मैंने सुनी है आह

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19 -Sep-2021 Mala Pahal Environment Poems 0 Comments  84 Views
मैंने सुनी है आह

मैंने सुनी है आह न कभी सुनने की थी चाह, फिर भी मैंने सुनी है आह। कभी कर्कश आवाजें करती थी टहनियाँ, कह रही है अनकही कहानियाँ, कभी हवाओं के झोंके से मचलती थी मेरी सहेलियाँ, अब खड़ी है फैलाकर झोलियाँ, अब न कटे हमारे साथ

कोहरा

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04 -Aug-2021 nil Environment Poems 0 Comments  232 Views
कोहरा

कोहरा आसमान लिख रहा सदियों से धरती के सुख-दुःख की कहानी बीसबी सदी की दास्तान लिखते लिखते छूट गई कलम टूट गया बाॅध हिम्मत का आठ-आठ ऑंसू बहाए आसमान ने अलसाए सुबह ने बटोर लिए ऑसूं बुनली झीनी-झीनी सफेद मटमैली चादर कोह

पर्यावरण बचावो प्यारे

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01 -Jun-2021 rtripathi Environment Poems 0 Comments  799 Views
पर्यावरण बचावो प्यारे

"पर्यावरण बचावो प्यारे" मौसम सुखे बादल रूठे माटी सूखी आंसू की बारिश,बंजर फसले हरियाली मैं कैसे लाऊँ उनके सूखे होटो पर,उपले जैसे चेहरों पर कर्ज में डूबे खेतो पर,सविधान की डाली में हरियाली मैं कैसे लाऊँ।। कैसे चाह

प्रकृति की मेंहदी धोता रहा ll

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27 -Apr-2021 Ankita Singh ( Ankita Lucknowist ) Environment Poems 0 Comments  277 Views
प्रकृति की मेंहदी धोता रहा ll

चाँद तो भोर तक खड़ा था, तू ही रैन सोता रहा , सागर हाथ से फिसल गया, तू क्षितिज पर रोता रहा l जब था वक्त हँस के जीने का, तब तू अपाधापी बोता रहा l इच्छाओं के अन्नत फेर में, एक और इच्छा संजोता रहा l इस भाग दौड़ के जीवन में , सब सु

जल ही जीवन है

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21 -Mar-2021 सिद्धार्थ पांडेय Environment Poems 0 Comments  336 Views
जल ही जीवन है

जल जीवन है पढ़ा लिखा पर, जीवन में इसपर गौर किया क्या। प्रकृति प्रदत्त इस संजीवनी को, मानव ने सिरमौर किया क्या। जिस रसराज को सींच न पाए वो फिरसे बौर दिया क्या। जल जीवन है पढ़ा लिखा पर, जीवन में इसपे गौर किया क्या। प्रा

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