Latest poems in Hindi & English on Republic day, India Gantantra Diwas, 26 January

ए बदरी

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30 -May-2022 Dhirendra Panchal Environment Poems 0 Comments  224 Views
ए बदरी

सुखि गइलें पोखरा आ जर गइलें टपरी , ए बदरी । कउना बात पे कोहाइ गइलू ए बदरी । देखा पेड़वा झुराई गइलें ए बदरी । बनरा के पेट पीठ एक भइलें घानी । कहा काहें होत बाटे राम मनमानी । गोरुअन के बेटवा क पेटवा ह खपरी , ए बदरी । कउना ब

बदरिया

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10 -Apr-2022 Dhirendra Panchal Environment Poems 0 Comments  166 Views
बदरिया

चान छुपउले जाली कहवाँ , घुँघटा तनिक उठाव । बदरिया हमरो केने आव । बदरिया हमरो केने आव । झुलस रहल धरती के काया छाया ना भगवान लगे । तोहरे बिना ये हो बदरी सब कुछ अब सुनसान लगे । लह लह लहके रेह सिवाने कातर नजर हटाव । बदरि

मैंने सुनी है आह

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19 -Sep-2021 Mala Pahal Environment Poems 0 Comments  185 Views
मैंने सुनी है आह

मैंने सुनी है आह न कभी सुनने की थी चाह, फिर भी मैंने सुनी है आह। कभी कर्कश आवाजें करती थी टहनियाँ, कह रही है अनकही कहानियाँ, कभी हवाओं के झोंके से मचलती थी मेरी सहेलियाँ, अब खड़ी है फैलाकर झोलियाँ, अब न कटे हमारे साथ

कोहरा

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04 -Aug-2021 nil Environment Poems 0 Comments  600 Views
कोहरा

कोहरा आसमान लिख रहा सदियों से धरती के सुख-दुःख की कहानी बीसबी सदी की दास्तान लिखते लिखते छूट गई कलम टूट गया बाॅध हिम्मत का आठ-आठ ऑंसू बहाए आसमान ने अलसाए सुबह ने बटोर लिए ऑसूं बुनली झीनी-झीनी सफेद मटमैली चादर कोह

पर्यावरण बचावो प्यारे

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01 -Jun-2021 rtripathi Environment Poems 0 Comments  1,028 Views
पर्यावरण बचावो प्यारे

"पर्यावरण बचावो प्यारे" मौसम सुखे बादल रूठे माटी सूखी आंसू की बारिश,बंजर फसले हरियाली मैं कैसे लाऊँ उनके सूखे होटो पर,उपले जैसे चेहरों पर कर्ज में डूबे खेतो पर,सविधान की डाली में हरियाली मैं कैसे लाऊँ।। कैसे चाह

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