PRAKRITI ( Environment )

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09 -May-2017 Abhineet Tiwary Environment Poems 0 Comments  207 Views
PRAKRITI ( Environment )

Num hui hain ghataye, fir v kyu hain Sukhi ye fizaye; Kya hai inhe kisi ka intezaar, ya kar rhi hain ye apni udaasi ka izhaar.... Kya sikayate kare ye kisi se, Koun sunte hain inki pukar..... Paas hoon main tere , kya tujhe iska ehsaas hai; Toot-ti hoon kabhi - jalti hoon kabhi, Naa taklif ho tujhe, isliye ujadti hoon kabhi.... Jhakjhorta rha hai hardm tu mujhe, apne khwahisho ke liye; Tabah hoti rhi hoon main.., pr koi wajah v to nhi roothne ke liye.... Hardm Maine diya tera sath hai, meri kurbaani tere khusiyo ki sougaat hai; Maar kar mujhe t

योग बचाएगा पृथ्वी को

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25 -Apr-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Environment Poems 0 Comments  237 Views
योग बचाएगा पृथ्वी को

योग बचाएगा पृथ्वी को ---------------------- योग बचाएगा पृथ्वी को , जल्दी इसे बचाना है | योग चेतना लाना जग में , योग चेतना लाना है || पर्यावरण साफ़ हो अपना , स्वच्छ बने सारे पुर ग्राम | हरे भरे परिवेश में होते , योगासन और प्राणायाम | हर

बना कहाँ से इतना पानी |

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22 -Mar-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Environment Poems 0 Comments  244 Views
बना कहाँ से इतना पानी |

बना कहाँ से इतना पानी | अग्नि पुंज सी धधक रही थी , जब ये अपनी धरती | सूरज से ही उपजी थी ये , सूरज सी थी तपती | युगों युगों जब रही प्रज्वलित , पानी कैसे आया झर झर झरने कल कल नदियाँ , सागर है लहराया | धरती पर पानी है सारा ,भाग त

Atmkatha Kursi ki

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15 -Jan-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Environment Poems 0 Comments  783 Views
Atmkatha Kursi ki

आत्मकथा एक कुर्सी की | ============== एक बार जब रात हुई थी , सारी दुनिया सोती थी | श्यामू ने देखा एक कुर्सी , सिसक सिसक कर रोती थी | पास पड़ी एक मेज ने पूछा ,”क्यों रोती हो कुर्सी बहिना | अच्छी खासी अभी तो थीं तुम, कष्ट तुम्हें क्य

Shauchalya Banwana Hai

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08 -Jan-2017 DINESH CHANDRA SHARMA Environment Poems 0 Comments  336 Views
Shauchalya Banwana Hai

शौचालय बनवाना है | ________________ गाँव गाँव बस्ती बस्ती में, नयी चेतना लाना है | शौचालय बनवाना हमको, शौचालय बनवाना है || खुली जगह पर मल त्यागेंगे, फैलेगा वह इधर उधर | पानी के सारे स्रोतों में, जायेगा रिसकर बहकर | नदियों झीलों झ

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