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Dharti Kahe Pukar

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06 -Jun-2015 Sunil Kushwah Environment Poems 0 Comments  2,911 Views
Sunil Kushwah

सुन्दर , सज्जित हमारी धरती
मनमोहक दुलारी धरती
जन - जन की ये प्यारी धरती
स्वप्न स्वरूपा न्यारी धरती !
फलते वृक्ष यहाँ की शान
कल - कल करती नदियों का गुणगान
ऊँची - ऊची पर्वत मालाएँ
सरस , सुगम्य सभी कलाएँ
करती हैं आह्वान
सुन्दर, सज्जित............(१)

महासागर का जाल बिछाए
हर्षित , कलवित राग सुनाए
महाद्वीपों की वर्णित माया
हर पल , हर क्षण पास बुलाएँ
कल्पित इसकी शान
सुन्दर ,सज्जित..............(२)

फिर क्यों मानव कर रहा है भूल
बिछा रहा क्यों हर पल शूल
नदियाँ , पर्वत और हवाएँ
अपनी व्यथा किसे सुनाएँ
कर रही निरंतर ये विषपान
सुन्दर ,सज्जित .........(३)

धरती माँ कर रही पुकार
न कर ,हे मानव तिरस्कार
मैं मिटी , तू भी मिट जाएगा
भूला न फिर वापिस आएगा
हर क्षण तू पछताएगा
हो जा चाहे जितना बलवान
सुन्दर , सज्जित.............. (४ )

करती है , सु न्दर प्रार्थना
समझ ले तू हृदय भावना
समझ - समझ कर चलना होगा
तन -मन अर्पित करना होगा
सुन्दर मैं , तू गर्वित होगा
सुरम्य , सरस जीवन होगा
मिलेगा तुझे जब सम्मान
सुन्दर , सज्जित...........(५)



Dedicated to
सभी पाठक मित्रों को समर्पित

Dedication Summary
१. धरती माँ की सुन्दरता के लिए
२. पर्यावरण की रक्षा के लिए
३. प्रदूषण समस्या निवारण के लिए
४. जन जागरूकता के लिए
५.सभी के सुन्दर भविष्य के लिए

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