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Kahani Beej Ki

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22 -May-2013 anuj bhargava Environment Poems 0 Comments  5,405 Views
anuj bhargava

कहानी बीज की

अभी मुझे मेरे हाल पर
जमीं पे पड़ा रहने दो
बच्चा हूँ अभी कच्चा हूँ
प्यार से मेरी ओर देख कर
मुझे जमीं की नमी में दबा रहने दो
वर्षा का आगमन होने तो दो
और रवि की किरण मुझ पे पड़ने तो दो
कृषि मौसम वैज्ञानिकों की देख रेख में
एक गरीब कृषक ने छोड़ा है जमीं पे
अंकुरित होने में ज्यादा समय नहीं लगाऊंगा
बस दो चार दिन में ही आपको
अपना कोमल चेहरा दिखाऊंगा
हवाओं के हिलोरों से झूल
अपना बचपन बिताऊंगा
मार्तण्ड के तेज के साथ
अपना विराट रूप दिखाऊंगा
मेरा ये रूप प्रकृति की महान देन होगी
जिसे पाकर इस जीवन में धन्य हो जाऊंगा
अपने को आपके समक्ष नत मस्तक होकर
कुछ आपकी भूक भी मिटाऊंगा
तभी अपने को धन्य पाऊंगा
वक्त के साथ बूढ़ा होकर
खुद ही जमीं से जुदा हो जाऊंगा
जर्जर होकर मैं भी आपसे कुछ चाहूँगा
मेरी अस्थियों को अपने घरों में सजा के रखना
तभी तो शायद स्वर्ग की सीढ़ी पाऊंगा
फिर नए बीजों से अपनी पीढ़ी संवार पाऊंगा
अपने को धन्य पाऊंगा

अनुज भार्गवा



Dedicated to
Dr. M S swaminathan

Dedication Summary
Remakable contribution for green revolutin in India

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