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Mausam Aur Manav

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29 -Mar-2015 Dr. Parshuram Shukla Environment Poems 0 Comments  1,666 Views
Dr. Parshuram Shukla

बच्चो! मौसम का मानव से,
बहुत पास का नाता ।
नहीं नचा सकते मौसम को,
मौसम हमें नचाता।।

रूप हमारा कैसा होगा?
यह मौसम तय करता।
जो जाता इसके खिलाफ,
वह, बिना मौत के मरता।।

सर्दी में हम आग तापते,
हीटर खूब जलाते।
ओढ़ रजाई मोटी वाली,
शाम ढले सो जाते।।

गर्मी के मौसम में तन से,
खूब पसीना बहता।
पास हमारे रहो हमेशा,
ए.सी., कूलर कहता।।

बरसातों में छोटे बच्चे,
छप-छप खूब नहाते।
छोटी-छोटी कागजवाली,
अपनी नाव चलाते।।

मौसम के अनुसार पेड़ पर,
फूल और फल आते।
गेहूँ, चावल, दालें, सब्जी,
सब मौसम से पाते।।

मौसम मे परिवर्तन हो तो,
आती विपदा भारी।
बच्चो! इससे कभी-कभी तो,
बढ़ जाती बीमारी।।

मौसम को गुस्सा आता तो,
वह शोले बरसाता।
और कभी वह आसमान से,
पानी खूब गिराता।।

आँधी, तूफां, बाढ़, सुनामी,
सब के सब आ जाते।
तेवर देख बुरे मौसम के,
जग वाले घबराते।।

पर मौसम विज्ञान हमारा,
इससे टक्कर लेता।
मौसम के सब हाल बता कर,
सावधान कर देता।।



Dedicated to
World Meteorological Day

Dedication Summary
World Meteorological Day (23 March)

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