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Prakriti Ki Raksha Humari Suraksha

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11 -Mar-2014 Lekha Krishnakumar Environment Poems 1 Comments  7,776 Views
Lekha Krishnakumar

(प्रक्रुति की रक्षा हमारी सुरक्षा)

फ़ौजी हूँ मैं फ़ौजी हूँ, रक्षक हूँ मन मौजी हूँ ||

न बनदूक है न तलवार है, न बम की हाहाकार है |
न तोप या जहाज़ है, न सरहद की दीवार है |
न वर्दी है न परेड है, न झँडे की मतभेद है |
पर फ़ौजी हूँ मैं फ़ौजी हूँ, सुरक्षक हूँ मन मौजी हूँ ||

लडता नहीं मैं दुशमन से, लडता हूँ प्रदूषण से |
डरता नहीं मैं firing से, डरता हूँ global warming से |
बचाता नहीं किसी order को, बचाता हूँ तो जंगल को |
ऐसा ही एक फ़ौजी हूँ, जनरक्षक हूँ मन मौजी हूँ ||

सफ़ायी करूं मैं गलियों की, कारखानों की और नदियों की |
हटाऊँ प्लास्टिक की थैली को, पटाखों को धमाकों को |
लगाऊँ पेड पौधों को, और सींचूँ अपनी प्रक्रुति को |
हाँ फ़ौजी हूँ मैं फ़ौजी हूँ, जगरक्षक हूँ मन मौजी हूँ ||



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1 More responses

  • poemocean logo
    Parshuramshukla (Guest)
    Commented on 07-April-2014

    Nice feelings..

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