मैं मोहब्बत हूं....!!

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22 -Aug-2017 pravin tiwari Family Poems 1 Comments  566 Views
मैं मोहब्बत हूं....!!

मैं मोहब्बत हूं..... हर दिल की मैं जरूरत हूं..... हां मैं मोहब्बत हूं.....!! माँ के आँचल लिपटे हुए उस बच्चे के लिए, उस माँ की आँखों का मैं तारा हूं.... हां मैं मोहब्बत हूं......!! बाप के कांधे चढ़ बेटा दुनिया जो देखे, उनके खून पसीने स

ये चाची मासी क्यूं नहीं बन पाती ?

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01 -Jul-2017 Ashwani Kumar Family Poems 0 Comments  506 Views
ये चाची मासी क्यूं नहीं बन पाती ?

एक बात अक्सर, मेरे ज़हन में बेवजह है आती, बच्चों की नज़र में ये चाची, मासी क्यू नहीं बन पाती ? भले चाची अपने दिल में दफ़न, हर राज़ खोल दे, अपने बच्चों से बढ़ कर, जेठानी के बच्चों पर प्यार उडेल दे, चाची चाह कर भी बच्चों के मन मे

नमन

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01 -May-2017 Neha Sonali Agrawal Family Poems 0 Comments  800 Views
नमन

मुट्ठी को बंद कर के, और आँखें अपनी मूंद के, अपने नन्हे कदमों से आया मैं इस लोक में, नये चेहरों से घिरा हुआ, आवाज़ों से गूँजता हुआ, बड़ा अलग है नगर ये, मेरी माँ की कोक से. यहाँ पिता का मिला स्पर्श, और माँ का दिखा रूप, बड़ो

घर परिवार

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25 -Apr-2017 युवा हिन्दी कवि Family Poems 0 Comments  1,131 Views
घर परिवार

आज के इस आधुनिक दौर में लोग अपनों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं,घर परिवार टुटता जा रहा है। एक संयुक्त परिवार के पढे लिखे लोग भी कुछ तुछ्य स्वार्थ व अहंकार के वश में होकर अपनों से दुर होते जा रहे है। इसी संदर्भ मे

आंगन

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05 -Mar-2017 Mamta Rani Family Poems 0 Comments  1,272 Views
आंगन

पहले का वो आँगन, लगता था कितना प्यारा। सुबह शाम लगता था, अपनों का जमावड़ा। हँसी-ठिठोली होती थी, खुशियाँ बांटी जाती थी। अब ना रहा वो आँगन, ना रहा संयुक्त परिवार सभी अलग -अलग रहते है , कोई ना रहता साथ। सभी अपने अपने, काम

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