Latest poems on teachers day, sikshak diwas kavita

Meri Dharm Patni

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11 -Dec-2018 Dr Tiwari Family Poems 0 Comments  23 Views
Meri Dharm Patni

तू जीत है मेरे संशय की, तू पहलू है मेरे आशय की तुमको पाया है मैंने तू अस्तित्व है मेरे संचय की जग सूना तुझ बिन मन सुना तुम बिन तुमको न पाऊँ तो मचल जाता है मन मेरा मिलती नहीं शकुन तेरे बिन तू मेरे जीवन की पूरी गाथा है त

कड़वा सच

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08 -Dec-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  75 Views
कड़वा सच

पिता करता जद्दोजहद माल जुट़ाने पर कर नही पाये इकठ्ठा ख़ज़ाने जरूरते पूरी करते छूट जाये पसीने करके सारे कर्तव्य पूरे जाए गंगा नहाने सोच रहा बच्चोंके राजमें गाये तराने अरसे से कहते आये बड़े बुजुर्ग सयाने औलाद को खि

जीवन शैली

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05 -Dec-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  54 Views
जीवन शैली

सोच रहा जीवन शैली मेरी ऐसी बनाऊ माँ पुकार उठे मेरे लाल पर वारी जाऊ अनगिनत योद्धा नौजवान पाए अतीतमें गाये जाते इनके गीत किस्से कहानियोंमें कलम घिस घिसकर अब हाथ हुए सुन्न व्यायाम करु तो पीस जाऊ गेहु में घुन्न अद्

माँ तो है बस माँ

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01 -Dec-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  217 Views
माँ तो है बस माँ

माँ निभाती कर्म बस यही उसका धर्म आओ दिखलाऊ उसके हृदय का मर्म बड़े नाज़ो अंदाज़ में पली बाबुल के घर बनी रही राजकुमारी भले थे दो ही ज़र चली आ रही सदियोंसे बनी अजीब रीत करने उजियारा चली बसाए दिलमे प्रीत पूरे परिवार माँ क

मोम का पुतला

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30 -Nov-2018 Abbas Bohari Family Poems 0 Comments  123 Views
मोम का पुतला

मुड़ जाता हूं जैसे जब भी कोई मोड़े बना खिलौना जी भरके तोड़े मरोड़े हूं मोम का पुतला आए मुझसे खेले सबको हंसाकर दर्द सारे खुद झेले खेल खेल में कर गए सारे इतने छेद करते गए उजागर मेरे छुपे सारे भेद अब कहा बचा मेरा वो रूप सु

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