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...AISH HI BACHAAYE

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20 -Jan-2015 indra jain Family Poems 0 Comments  1,156 Views
indra jain

written in2011(before Aradhyaas birth)

जयाजी
अपने चिर परिचित अंदाज़ में
स्टूल पर खड़े होकर
अमितजी की कमीज़ में
बटन टांक रही थी
कि अचानक
अमितजी ज़ोर से चिल्लाये -
क्या करती हो ,
कोई काम ध्यान से नहीं कर सकती हो।
जयजी थोड़ा सकपकाई ,
फिर आँखें दिखाते हुए बोली -
जब sugar testing के लिए
सुई लगती है
तब तो नहीं चिल्लाते हो ,
बेमतलब
मुझ पर ही गुर्राते हो।
अब नर्वसाने की बारी
अमितजी की थी।
जयाजी कुछ और कह पातीं
कि तभी ऐश ने
कमरे में प्रवेश किया।
अमितजी चैन की सांस लेते हुए बोले -
ज़रा धीरे बोलो ,
देखो कोई और (अराध्या )भी
सुन रहा है।
और मन ही मन बोले -
जान बची लाखों पाये ,
जया से तो ऐश ही बचाये ........
जया से तो....



Dedicated to
Amitji & Jayaji

Dedication Summary
this poem is about Amitji & Jayaji
I like them very much

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