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Ghar Pariwaar

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29 -Mar-2015 Dr. Parshuram Shukla Family Poems 0 Comments  3,204 Views
Dr. Parshuram Shukla

छोटा सा परिवार हमारा,
साथ-साथ हम रहते।
एक दूसरे से हम सारी,
अपनी बातें कहते।।

पापाजी दफ्तर जाते हैं,
शाम ढले घर आते।
अपने दफ्तर की सब बातें,
आकर हमें बताते।।

मम्मी मेरी शाला जाती,
बच्चे खूब पढ़ाती।
चार बजे वापस आ घर में,
काम सभी निपटाती।।

दीदी मेरी सोशल वर्कर,
सबकी सेवा करती।
उससे बड़े-बड़े डरते वह,
नहीं किसी से डरती।।

मैं छोटा सा बच्चा हूँ पर,
करता रोज पढ़ाई।
एक बार कक्षा मे मैंने,
कविता नई बनाई।।

लिख डाली मैंने कविता में,
घर की सत्य कहानी।
पापा तुम घर के राजा हो,
मम्मी घर की रानी।।

दीदी राजकुमारी मेरी,
परियों की शहजादी।
बातें सबसे करती जैसे,
घर की बूढ़ी दादी।।

पापा कभी-कभी दफ्तर से,
महानगर भी जाते।
पाँच सितारों में रहते पर,
बोर बहुत हो जाते।।

मम्मी अपनी मम्मी के घर,
मई-जून में जाती।
लेकिन उसे वहाँ पर हरदम,
घर की याद सताती।।

घर से सबका नाता ऐसा,
भूल नहीं हम पाते।
दूर कभी जाते भी हैं तो,
झट वापस आ जाते।।



Dedicated to
World Family Day (15 May)

Dedication Summary
World Family Day (15 May)

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