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Haan Mera Bhi Kabhi Ghar Hua Karta Tha

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15 -Jan-2015 Ajit Singh Negi Family Poems 0 Comments  1,741 Views
Ajit Singh Negi

माँ जहा प्यार से मुझे सुलाती थी
प्यार से जब वो मझे सुबह जगाती थी
पापा जहा मुझे डांट के रुलाया करते थे
वो नींद में जब मेरा माथा सहलाया करते थे
भाई जब मझे रोज सताता था
कभी मझसे रूठता कभी मनाता था
खुसनुमा जहा हर एक पल हुआ करता था
हा मेरा भी कभी घर हुआ करता था


मिल जुल के जहा हम खुशिया मनाते थे
गम में जहा हम साथ हो जाते थे
मजाक में जहा हम अपनी बहन को चिढ़ाते थे
रुठने पे उसके उसके लिए तोहफे लाते थे
करते थे सैतनिया जहा हम लाखो
और दिल में पकडे जाने का डर हुआ करता था
हा मेरा भी कभी घर हुआ करता था

बेवजह हसते थे जहा
बेवजह अपनों को सताते थे
रुठते थे कभी अपनों से
तो कभी उन्हें मनाते थे
हर पल जहा खुशियो का मंजर हुआ करता था
हा मेरा भी कभी घर हुआ करता था
हा मेरा भी कभी घर हुआ करता था



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